अब किसान अपने घर बैठे ही MP किसान ऐप के माध्यम से खाद का ई-टोकन बुक कर सकेंगे। उन्हें केवल अपनी फार्मर रजिस्ट्री और पहचान पत्र से पंजीकरण करना होगा। इसके बाद सिस्टम उनकी भूमि और बोई गई फसल के अनुसार खाद की मात्रा स्वतः निर्धारित करेगा। किसान को मोबाइल पर टोकन मिलेगा और निर्धारित तिथि पर वह बिना किसी धक्का-मुक्की, बिना लाइन में लगे सीधे केंद्र से खाद प्राप्त कर सकेगा।
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कतारों की पीड़ा होगी समाप्त
बीते वर्षों में खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की जो तस्वीर सामने आती थी, वह किसी संघर्ष से कम नहीं थी। घंटों लंबी लाइनें, अव्यवस्था, गुस्से और लाचार किसानों की भीड़। नई ई-टोकन व्यवस्था से यह पीड़ा अब इतिहास बनने जा रही है। यह कदम न केवल किसानों का समय बचाएगा, बल्कि उनकी गरिमा को भी सुरक्षित करेगा।
कालाबाजारी पर सीधा प्रहार
कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डीडीए एके उपाध्याय ने बताया कि जिले में लगभग 1 लाख 80 हजार किसान पंजीकृत हैं और पिछले वर्ष 80 हजार मीट्रिक टन खाद का वितरण हुआ था। नई प्रणाली से हर किसान की खाद की मात्रा तय होगी, जिससे कालाबाजारी, भंडारण और अवैध बिक्री पर सख्त अंकुश लगेगा।
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प्रशासन की सख्त निगरानी
कलेक्टर बालागुरू के. ने जिला पंचायत की टीएल बैठक में सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 जनवरी से ई-टोकन व्यवस्था पूरी तरह सुचारू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर किसान की फार्मर रजिस्ट्री सुनिश्चित करना अनिवार्य है ताकि कोई भी पात्र किसान खाद से वंचित न रहे। शुरुआती 15 दिनों तक ई-टोकन और पुरानी व्यवस्था दोनों साथ चलेंगी, इसके बाद पूरी प्रणाली डिजिटल होगी।
उम्मीदों की नई फसल
यह व्यवस्था केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में सम्मान और सुविधा की नई फसल बोने का प्रयास है। जिस किसान की सुबह खेत से शुरू होती है और शाम चिंता में ढल जाती है, अब उसे खाद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। यह बदलाव किसानों के आत्मसम्मान को सशक्त करेगा और खेती को फिर से विश्वास देगा।
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