11 साल पहले लिया था संकल्प
मनोहर महेश्वरी के बेटे महेंद्र महेश्वरी बताते हैं कि उनके पिता ने करीब 11 साल पहले ही देहदान का संकल्प ले लिया था। साल 2020 में उन्होंने विधिवत फॉर्म भरकर अपनी इच्छा दर्ज करवा दी थी। परिवार के लिए यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि वर्षों से तैयार किया गया एक संस्कार था। रविवार तड़के 3.18 बजे जब मनोहर जी ने अंतिम सांस ली, तो दुख से भरे उस पल में भी परिवार ने भावनाओं से ऊपर उठकर उनकी इच्छा को प्राथमिकता दी।
जब अंतिम संस्कार नहीं, देहदान बना संस्कार
आमतौर पर मृत्यु के बाद परिवार अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट जाता है, लेकिन महेश्वरी परिवार ने एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने तय किया कि पिता की देह अग्नि को नहीं, बल्कि ज्ञान की लौ को समर्पित की जाएगी। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन बेटे और परिजनों ने कहा कि अगर पिता ने जीवन भर समाज के लिए सोचा, तो मृत्यु के बाद भी उनका शरीर समाज के काम आए, इससे बड़ा सम्मान और क्या हो सकता है।
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पहली बार सीहोर में पुलिस सलामी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले वर्ष जुलाई में घोषणा की थी कि अंगदान और देहदान करने वालों को राजकीय सम्मान दिया जाएगा। इसी फैसले के तहत मनोहर महेश्वरी सीहोर जिले के पहले व्यक्ति बने, जिन्हें यह सम्मान मिला। सुबह 11.30 बजे जिला अस्पताल परिसर में जब पुलिस और होमगार्ड्स के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। वह पल सिर्फ एक व्यक्ति का सम्मान नहीं था, बल्कि मानवता के प्रति सम्मान था।
भोपाल में भावी डॉक्टर सीखेंगे जीवन का पाठ
सिविल सर्जन डॉ. उमेश श्रीवास्तव के अनुसार मनोहर जी की पार्थिव देह को पूरे सम्मान के साथ भोपाल के हमीदिया अस्पताल भेजा गया है। वहां मेडिकल कॉलेज के छात्र उनकी देह पर अध्ययन और शोध करेंगे। यानी मनोहर महेश्वरी अब भी जीवित रहेंगे। किताबों में नहीं, बल्कि डॉक्टरों के ज्ञान में, मरीजों की जिंदगी में और चिकित्सा विज्ञान की प्रगति में। यह देह आने वाले वर्षों तक कई जिंदगियों को बेहतर बनाने में योगदान देगी।
नया नियम, नई सोच का संदेश
सरकार के नए नियम के अनुसार अब मध्यप्रदेश में देहदान और अंगदान करने वालों को गार्ड ऑफ ऑनर मिलेगा और उनके परिवारों को हर साल 26 जनवरी व 15 अगस्त को सरकारी कार्यक्रमों में वीआईपी अतिथि के रूप में बुलाया जाएगा। यह केवल सम्मान नहीं, बल्कि समाज को दिया गया एक मजबूत संदेश है कि असली नायक वही हैं जो मरकर भी दूसरों को जीवन दे जाते हैं। मनोहर महेश्वरी आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका नाम सीहोर के इतिहास में ‘महादानी’ बनकर हमेशा अमर रहेगा।
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