सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा से जुड़े विवाद पर स्वतः संज्ञान लिया है। पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों की ओर से उठी गंभीर चिंताओं के बीच कोर्ट ने इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की अवकाशकालीन बेंच सोमवार, 29 दिसंबर को इसकी सुनवाई करेगी। इस बेंच में सीजेआई सूर्य कांत के अलावा जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.जी. मसीह शामिल हैं।
ये है विवाद की जड़
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच (तत्कालीन सीजेआई बीआर गवई की अगुवाई में) ने पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था। इसके तहत अरावली पहाड़ियों को परिभाषित करने का मानदंड तय किया गया। स्थानीय राहत (लोकल रिलीफ) से 100 मीटर या इससे अधिक ऊंचाई वाली भूमि रूपों को ही अरावली हिल्स माना जाएगा। अरावली रेंज को दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों के रूप में परिभाषित किया गया जो एक-दूसरे से 500 मीटर की दूरी के भीतर हों।
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