अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर कांग्रेस की ओर से उदयपुर में “अरावली बचाओ अभियान” के तहत शनिवार को एक विशाल जन-जागरण रैली और पैदल मार्च का आयोजन किया गया। यह रैली नगर निगम परिसर स्थित टाउनहॉल से शुरू होकर अश्वनी बाजार, हाथीपोल चौराहा होते हुए चेतक सर्कल स्थित मोहता पार्क पर जाकर संपन्न हुई। रैली उदयपुर शहर और उदयपुर देहात कांग्रेस कमेटी की ओर से संयुक्त रूप से निकाली गई, जिसमें शहर और जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
इस जन-जागरण रैली का नेतृत्व उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ और उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने किया। रैली में ब्लॉक अध्यक्ष, जिला व ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी, पूर्व विधायक, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल रहे। पूरे मार्ग में कार्यकर्ताओं ने अरावली संरक्षण के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की।
मोहता पार्क में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि अरावली पर्वतमाला पर लगातार हो रहे हमले भाजपा की नीति, नीयत और शासन की सच्चाई को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अरावली आज केवल अवैध खनन का ही शिकार नहीं है, बल्कि भाजपा सरकार की संरक्षणहीन नीतियों की भेंट भी चढ़ रही है। मीणा ने कहा कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली के संरक्षण के लिए जन-जागरण के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बनाना बेहद जरूरी है, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अरावली संरक्षण के पक्ष में मजबूती से पैरवी की जा सके।
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वहीं शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि अरावली पर्वतमाला की पवित्र चोटियां केवल पहाड़ नहीं हैं, बल्कि हमारी सभ्यता की जड़ें, हमारी आस्था की ऊंचाइयाँ और आने वाली पीढ़ियों के जीवन की सबसे मजबूत ढाल हैं। उन्होंने कहा कि अरावली ने ही रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोका, जलस्रोतों को संरक्षित किया और सदियों से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखा है। राठौड़ ने स्पष्ट किया कि अरावली को बचाने का यह संघर्ष किसी एक दिन, एक यात्रा या किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। रैली के माध्यम से कांग्रेस ने राज्य और केंद्र सरकार से अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए ठोस, प्रभावी और स्थायी कदम उठाने की मांग की तथा चेतावनी दी कि यदि अरावली पर हमले नहीं रुके तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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