रमजान शुरू होते ही जहां पहले फलों खासकर खजूर, अनार, सेब, केला आदि के भाव तेजी से बढ़ जाते थे, इस बार ऐसा नहीं हुआ। हालांकि बिक्री में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब्दुल शाहिद सहित अन्य फल विक्रेताओं ने बताया कि सर्दी के कारण फलों की आवक (आपूर्ति) बहुत अच्छी है, जिससे दाम स्थिर बने हुए हैं। बिक्री में 20-30% की बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन कीमतें नहीं बढ़ीं। रोजेदारों को सस्ते और ताजे फल आसानी से मिल रहे हैं। इसी प्रकार टोपी, रुमाल और इत्र आदि के सामानों की मांग में रमजान के कारण 10-15% की बढ़ोतरी हुई है। इत्र, टोपी, रुमान विक्रेता मोहम्मद शफीक आदि ने बताया कि इस बार किसी भी वस्तु की कीमत नहीं बढ़ी, सिर्फ बिक्री बढ़ी है। बाजार में कई जगह विशेष स्टॉल और दुकानें लगी हैं। ईद तक बिक्री में 40% या इससे अधिक इजाफे की उम्मीद है। काफला जामा मस्जिद के नीचे खजूर की दुकानों पर खासा रौनक है। विक्रेताओं ने बताया कि खजूर इफ्तार का मुख्य हिस्सा होता है। रमजान में इसकी बिक्री हर साल अन्य दिनों की अपेक्षा 30-40 प्रतिशत अधिक रहती है। इस बार सर्दी में रोजे आने के कारण ठंडे पेय सहित शरबत बनाने के सामानों एवं फलों की बिक्री में कोई इजाफा नहीं हुआ है। जबकि गर्मी में रमजान में ठंडे पेयजल आदि की बिक्री अधिक रहती थी। रोजेदारों का कहना है कि रमजान मुसलमानों के लिए आत्म-शुद्धि, इबादत, कुरान तिलावत और दान का महीना है। उल्लेखनीय है कि इस साल रमजान 1447 हिजरी का पहला रोजा भारत में 19 फरवरी से शुरू हुआ। सर्दियों में माहे रमजान की शुरूआत होने से झुलसा देने वाली गर्मी से पूरी तरह रही। माहे रमजान के गुरुवार को आठ रोजे पूरे हो जाएंगे। रमजान माह को तीन अशरों में विभाजित किया जाता है। जिसमें पहले दस दिन रहमत के माने जाते हैं। दरमियानी अशरा यानी बीच के दस दिन मगफिरत के और आखिरी अशरा जहन्नुम से छुटकारा पाने के हैं। बाजारों में जहां इन दिनों सहरी एवं इफ्तार के सामानों के लिए चहल-पहल तेज हो गई हैं।ईद की खरीदारी भी परवान पर आने लगी है। काफला बाजार से सुभाष बाजार तक ईद की खरीदारी होने लगी है।
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