सहरसा सदर अस्पताल में एक गंभीर रूप से घायल मरीज को इलाज के बजाय छुट्टी दिए जाने पर परिजनों ने प्रभारी डीएस से शिकायत की है। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। यह घटना बुधवार शाम को सामने आई। तीनों घायलों को 10 जनवरी की सुबह अस्पताल में कराया था भर्ती जानकारी के अनुसार, बीते 10 जनवरी को सहरसा सदर थाना क्षेत्र के ढोली गांव में खेत में गेहूं की फसल की सिंचाई को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था। इस विवाद में ढोली निवासी 62 वर्षीय माहेश्वरी साह, 59 वर्षीय कपिलदेव साह और 55 वर्षीय श्याम साह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तीनों घायलों को 10 जनवरी की सुबह करीब 8 बजे सहरसा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घायल माहेश्वरी साह के नाती सूरज कुमार ने बताया कि उनके नाना का इलाज 10 जनवरी से सदर अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में चल रहा था। हालांकि, 14 जनवरी बुधवार शाम को उन्हें अचानक डिस्चार्ज स्लिप थमा दी गई। डॉक्टरों ने कहा कि मरीज अब ठीक हो चुके हैं और उन्हें घर ले जाया जा सकता है। सूरज कुमार का आरोप है कि उनके नाना के सिर और पैर पर फरसा और रॉड से गंभीर हमला हुआ था, जिससे पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और सिर में भी गहरी चोट है। ज्यादा बोलने पर उनके सिर से खून निकलने लगता है और वे उठ-बैठ पाने की स्थिति में भी नहीं हैं। परिजनों का कहना है कि ऐसी गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में रखकर बेहतर इलाज की आवश्यकता थी, लेकिन डॉक्टरों ने कथित तौर पर लापरवाही बरतते हुए उन्हें छुट्टी दे दी। इस घटना से नाराज परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस मामले पर सदर अस्पताल की उपाधीक्षक एसएस. मेहता ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि मरीज की स्थिति गंभीर पाई जाती है, तो मेडिकल बोर्ड के माध्यम से इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जरूरत पड़ने पर मरीज को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है।
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