हर शहर, उसकी व्यवस्थाएं, नीतियां, आबो-हवा और माहौल महिलाओं को अलग ढंग से प्रभावित करता है। वहां की सुविधाओं में किसी भी गैप के प्रति महिलाएं ज्यादा संवेदनशील होती हैं और उनका नजरिया भी अलग होता है। महिला दिवस के मौके पर सिटी भास्कर ने ‘वुमन लीड चेंज’ कंटेस्ट के जरिए चुनी गई महिलाओं को जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी और पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के साथ काम करने का अवसर दिया। सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े कुछ गैप्स को लेकर इन महिलाओं ने न केवल अपनी सुरक्षा, बल्कि पूरे शहर की बेहतरी के लिए ठोस सुझाव दिए। अधिकारियों ने इन सुझावों को गंभीरता से सुना और कई पर अमल का भरोसा भी दिलाया। सुझावों में एसएसओ ऐप, स्ट्रीट लाइट्स, नारी चौपाल और पूरे शहर को टोबैको-फ्री बनाने की मुहिम जैसे मुद्दे शामिल रहे। साथ ही जयपुर के लांगड़ियावास में कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की जानकारी भी दी गई। कलेक्टर से चर्चा के लिए चुनी गई तीन महिलाओं में मंगलम मेडिसिटी हॉस्पिटल की डायरेक्टर नेहा गुप्ता, डेंटल सर्जन व बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की पूर्व ब्रांड एंबेसडर डॉ. अनुपमा सोनी और एमपीएस स्कूल की टीचर आरती महेश्वरी शामिल थीं। कंटेंट : प्रणीता भारद्वाज और किरन कुमारी किंडो | फोटो : मनोज श्रेष्ठ पहले सिस्टम समझा, फिर कमिश्नर को दिए सुरक्षा सुझाव कलेक्टर को समस्याओं के साथ समाधान भी बताए रानू शर्मा से अभय कमांड सेंटर की कार्यप्रणाली समझतीं विमन रीडर्स विमन रीडर्स ने सुरक्षा के लिए दिए ये सुझाव… हर स्कूल और कॉलेज में नियमित सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग प्रोग्राम हो। महिला सुरक्षा में AI तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाए। हर बड़ी सोसाइटी में ‘सुरक्षा सखी’ नियुक्त की जाए और उन्हें कानूनी सहायता व फर्स्ट-रिस्पांडर ट्रेनिंग दी जाए। ‘सेफ्टी वॉलंटियर नेटवर्क’ बनाया जाए। डार्क स्पॉट्स की पहचान कर तुरंत प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला कलेक्टर का आश्वासन… कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने कहा कि जल्द अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू होगा ताकि जयपुर जाम-फ्री बन सके। एंटी-स्पिटिंग और टोबैको-फ्री शहर के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। ड्रग्स रोकथाम के लिए शिक्षण संस्थानों को WHO के 9 इंडिकेटर्स अपनाने की सलाह दी गई है। शहर में डार्क स्पॉट्स खत्म करने के लिए 23 लाख एलईडी लाइटें लगाई जा चुकी हैं। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल और कालिका स्क्वाड की प्रभारी रानू शर्मा के साथ काम करने के लिए चुनी गई तीन रीडर्स में गायनेकोलॉजिस्ट व एजुकेशनिस्ट डॉ. रुचिरा सोलंकी, लीगल कंसल्टेंट खुशबू शर्मा और सोशियोलॉजी बीए की स्टूडेंट नेहा सोनी शामिल रहीं। पहले दिन इन रीडर्स ने जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की कार्यशैली और महिला सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को समझा। अभय कमांड सेंटर में आधुनिक निगरानी व नियंत्रण प्रणाली देखी। साथ ही नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली जानी, जहां डिजिटल अरेस्ट, UPI फ्रॉड और फिशिंग जैसी शिकायतों पर 24×7 मॉनिटरिंग होती है। महिलाओं ने ‘राज कॉप सिटीजन’ ऐप इंस्टॉल कर इसके SOS, इमरजेंसी हेल्प, शिकायत दर्ज करने और वेरिफिकेशन जैसे फीचर्स भी समझे। }सड़कें स्ट्रीट डॉग्स से मुक्त हों : महिलाओं ने कहा कि शहर में सड़कों पर स्ट्रीट डॉग्स की बढ़ती संख्या बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बन रही है। इसके लिए विशेष टीम गठित कर नियंत्रण जरूरी है। }शिक्षण संस्थानों के बाहर ड्रग्स पर रोक : कॉलेज और स्कूलों के बाहर नशे का कारोबार युवाओं को प्रभावित कर रहा है। इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। }एंटी-स्पिटिंग अभियान : सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की आदत से शहर की छवि खराब होती है। इस पर जुर्माना और जागरूकता अभियान दोनों चलाए जाएं। }परकोटे में शटल बस या इलेक्ट्रिक कार्ट : परकोटे के अंदर आवागमन आसान बनाने के लिए शटल बस या इलेक्ट्रिक कार्ट की व्यवस्था हो। }डार्क स्पॉट्स पर हाई-मास्ट लाइटें : अंधेरे वाले इलाकों में रोशनी की बेहतर व्यवस्था हो ताकि अपराधों पर रोक लग सके। }वन सिटी-वन एप : महिलाओं ने सुझाव दिया कि शहर की सभी सेवाओं जैसे यातायात, सफाई, सुरक्षा और शिकायत निवारण को एक ही ऐप से जोड़ा जाए। }शी-टीम की तैनाती : भीड़भाड़ वाले इलाकों में सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मी तैनात हों ताकि मनचलों पर लगाम लगाई जा सके। }सार्वजनिक स्थानों पर बैठने की व्यवस्था : मॉल्स, बाजारों, पार्कों, चौकों और प्रमुख मार्गों पर बैठने की व्यवस्था हो ताकि बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे थकने पर बैठ सकें। }महिला-फ्रेंडली पब्लिक ट्रांसपोर्ट : अहमदाबाद BRTS और दिल्ली मेट्रो की तरह महिलाओं के लिए सुरक्षित कोच और बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाए। }स्वच्छ और सुरक्षित पब्लिक टॉयलेट्स : महिलाओं के लिए साफ और सुरक्षित सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएं।
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