जोधपुर में कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के लगभग 20 दिन बाद पुलिस ने इस प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की है। बोरानाडा थाने में कंपाउंडर देवी सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उस पर चिकित्सा नियमों की अवहेलना और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है।
आश्रम में बिगड़ी तबीयत, इंजेक्शन के बाद हालत गंभीर
जानकारी के अनुसार 28 जनवरी को पाल रोड स्थित आरती नगर आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा को सांस लेने में तकलीफ हुई थी। उपचार के लिए बुलाए गए कंपाउंडर देवी सिंह ने उन्हें कुछ इंजेक्शन लगाए। इंजेक्शन लगाने के करीब 20 मिनट बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
एसआईटी जांच में नियमों के उल्लंघन के संकेत
मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की पड़ताल में सामने आया कि आरोपी ने बिना अधिकृत डॉक्टर की सलाह के शेड्यूल-एच श्रेणी की दवाएं दीं। नियमानुसार ऐसी दवाएं केवल पंजीकृत चिकित्सक की देखरेख में ही दी जा सकती हैं। जांच में यह भी सामने आया कि वह स्वयं पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर नहीं होने के बावजूद उपचार करता पाया गया।
पूछताछ में बयान विरोधाभासी
पूछताछ के दौरान आरोपी के बयानों में विरोधाभास सामने आया है। पहले उसने पुरानी पर्ची के आधार पर इंजेक्शन लगाने की बात कही, जबकि बाद में दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदने का दावा किया। हालांकि मेडिकल स्टोर संचालक ने इस दावे को नकार दिया।
एफएसएल रिपोर्ट और संभावित सजा
एफएसएल रिपोर्ट में मौत का कारण सांस संबंधी बीमारी बताया गया है। पुलिस के अनुसार, यदि लापरवाही के आरोप साबित होते हैं तो आरोपी को दो साल तक की सजा हो सकती है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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