सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन वितरण में आ रही चावल की कमी की शिकायतों के बाद प्रशासन की जांच में बड़ा कस्टम मिलिंग घोटाला सामने आया है। शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई में निवास विकासखंड के मनेरी क्षेत्र की छह राइस मिलों में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं उजागर हुई हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 13 करोड़ रुपये मूल्य का चावल गायब है या अमानक स्थिति में पाया गया है।
जिला कलेक्टर के निर्देश पर जिला आपूर्ति विभाग और संबंधित एजेंसियों ने नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से कस्टम मिलिंग के लिए दी गई धान की जांच कराई। जिला आपूर्ति अधिकारी संत कुमार भलावी के अनुसार दिसंबर 2024 में मिलर्स को पीडीएस के लिए धान आवंटित की गई थी। अनुबंध की शर्तों के मुताबिक मिलर्स को तीन माह के भीतर तय मात्रा में चावल जमा करना था, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद कई मिलों ने चावल जमा नहीं किया।
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12 से 17 दिसंबर के बीच की गई भौतिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मनेरी स्थित मेकल इंडस्ट्रीज में जहां 5,470 क्विंटल चावल जमा होना चाहिए था, वहां 5,357 क्विंटल पोल्ट्री फीड पाया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि चावल को जानबूझकर हटाकर उसकी जगह अमानक सामग्री रखी गई। इसी तरह दुर्गा फूड प्रोडक्ट राइस मिल में जांच के दौरान 9,533 क्विंटल चावल पूरी तरह गायब मिला। शारदा इंडस्ट्रीज और श्री इंडस्ट्रीज जांच के समय बंद पाई गईं, जिससे संदेह और गहरा गया। व्हाइट ग्रेन एग्रो फूड प्राइवेट लिमिटेड में भी 2,484 क्विंटल चावल की भारी कमी दर्ज की गई।
इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मेकल इंडस्ट्रीज, दुर्गा फूड प्रोडक्ट, शारदा इंडस्ट्रीज और श्री इंडस्ट्रीज को सील कर दिया है। शेष दो मिलों की भूमिका की भी विस्तृत जांच की जा रही है। जिला आपूर्ति विभाग ने पूरी जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। अधिकारियों का कहना है कि कलेक्टर के निर्देश के बाद संबंधित मिलर्स के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने पीडीएस व्यवस्था की निगरानी और पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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