Rohtas Ropeway Accident: रोहतास का 13 करोड़ की लागत वाला रोपवे प्रोजेक्ट ट्रायल रन में पिलर गिरने से विवादों में घिर गया है. इससे सुरक्षा पर सवाल उठ गया है. बता दें कि रोहतास प्रखंड मुख्यालय से प्रसिद्ध चौरासन मंदिर तक रोपवे का निर्माण कराया गया था ताकि दुर्गम और लंबी दूरी को बेहद कम समय में तय किया जा सके. इस योजना के तहत करीब 60 किलोमीटर की दूरी कुछ ही मिनटों में पूरी करने का दावा किया जा रहा था. इसके बाद जांच के आदेश दिया गया है. इससे स्थानीय लोगों में निराशा छाई है.
जानकारी के अनुसार रोहतास प्रखंड मुख्यालय से प्रसिद्ध चौरासन मंदिर तक रोपवे का निर्माण कराया गया था ताकि दुर्गम और लंबी दूरी को बेहद कम समय में तय किया जा सके. इस योजना के तहत करीब 60 किलोमीटर की दूरी कुछ ही मिनटों में पूरी करने का दावा किया जा रहा था. इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत आई है. प्रशासन और पर्यटन विभाग को उम्मीद थी कि रोपवे शुरू होने से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा.
भविष्य में यात्रियों की जान की सुरक्षा पर सवाल
लेकिन ट्रायल के दौरान पिलरों के गिरने की घटना ने इन सभी उम्मीदों को झटका दे दिया. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब बिना यात्रियों के ट्रायल में ही ढांचा कमजोर साबित हो गया तो भविष्य में यात्रियों की जान की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है. घटना की सूचना मिलते ही संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल ट्रायल को रोक दिया गया है.
जताई जा रही है ये आशंका
सूत्रों की मानें तो शुरुआती जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही, घटिया सामग्री के इस्तेमाल और तकनीकी खामियों की आशंका जताई जा रही है. हालांकि अभी तक आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए जाने की बात कही जा रही है ताकि यह तय किया जा सके कि इतनी बड़ी परियोजना में चूक कहां और किस स्तर पर हुई.
अब सबकी निगाहें जांच पर
रोपवे से जुड़े हादसे के बाद स्थानीय व्यवसायियों, श्रद्धालुओं और पर्यटन से जुड़े लोगों में निराशा है. जिस परियोजना से क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद की जा रही थी वह अब सवालों में घिर गई है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या रोपवे को जरूरी सुधार के साथ दोबारा सुरक्षित तरीके से शुरू किया जा सकेगा या फिर यह योजना भी अधूरी और विवादित परियोजनाओं की सूची में शामिल हो जाएगी.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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