Blue Tongue Disease In Goats: बकरी और अन्य पागुर करने वाले पशुओं में ब्लू टंग यानी नीली जीभ एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो पशुओं के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करती है. बकरियों में इस बीमारी से 30 से 40 प्रतिशत तक मृत्यु दर देखी जाती है. यह बीमारी मुख्य रूप से मच्छरों के काटने से फैलती है, जो संक्रमित पशु से स्वस्थ पशु तक वायरस पहुंचाते हैं.
ऐसे में बोकारो के चास पेट क्लीनिक के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह बीमारी छोटे मच्छर (क्यूलिकोइड्स) से फैलती है, जो जानवरों का खून चूसते हैं और वायरस को एक पशु से दूसरे पशु में पहुंचा देते हैं.

इस बीमारी से ग्रसित बकरियों की पहचान करना बहुत ही आसान है. इसमें बकरियों के शरीर का तापमान 103 से 105 डिग्री फारेनहाइट तक हो जाता है. इसके साथ ही तेज बुखार, जीभ का नीला पड़ जाना और मुंह में सूजन भी देखने को मिलती है. नाक से पानी आना, दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं और आखिर में बकरी कमजोर होकर मर भी सकती है.

वहीं इस बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालकों को सबसे पहले बकरी के बाड़े में साफ-सफाई रखनी चाहिए और आसपास पानी के नालों में जल जमाव को साफ करना चाहिए, जिससे मच्छरों का प्रकोप कम हो. इसके अलावा बकरियों के रखरखाव के लिए सुरक्षित स्थान का चयन करें और खिड़कियों पर जाली जरूर लगाएं.
Add News18 as
Preferred Source on Google

नियमित तौर पर फॉगिंग या स्प्रे करें, ताकि मच्छर पूरी तरह से खत्म हो जाएं. साथ ही लक्षण वाली बकरियों को स्वस्थ बकरियों से अलग रखें और बकरियों को नियमित रूप से पोषण युक्त भोजन और पीने के लिए साफ पानी दें. उनका ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

वहीं इस बीमारी के उपचार के लिए ब्लू टंग वायरल बीमारी के लक्षण वाली बकरियों को जल्द से जल्द पशु चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए. शुरुआती सपोर्टिव इलाज से जानवरों को बचाया जा सकता है. समय पर सही टीकाकरण होने से भी बकरियों को इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.