पहाड़ों में लोग आज भी परंपरागत तरीकों से खाना बनाते हैं. यहां दाल, अनाज और सब्ज़ियां ज़्यादातर अपने खेतों में उगाई जाती हैं. इसी वजह से पहाड़ी खाने में मिलावट नहीं होती और उसका असली स्वाद बरकरार रहता है. मंडुए की रोटी, झंगोरे की खीर, भट्ट की दाल, आलू के गुटके और बेडू पूरी जैसे व्यंजन पहाड़ की पहचान हैं.
बेडु पुरी की रेसिपी
बेडू पूरी भी पहाड़ों की एक खास और पारंपरिक डिश है. इसे चना और मसूर की दाल से बनाया जाता है. दाल को रात भर भिगोकर पीसा जाता है और उसमें हल्के मसाले मिलाए जाते हैं.. फिर इस पेस्ट को आटे की लोई में भरकर पूरी बनाई जाती है और गर्म तेल में तली जाती है. यह पूरी बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम होती है. इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि एक बार खाने वाला इसे दोबारा जरूर खाना चाहता है.
पहाड़ी खाने की सबसे बड़ी खासियत उसकी सादगी है. यहां ज्यादा तेल-मसाले का इस्तेमाल नहीं किया जाता, फिर भी खाने में अलग ही खुशबू और स्वाद होता है. लोग यहां भोजन को सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव के रूप में देखते हैं. यही कारण है कि पहाड़ों का खाना खाने के बाद मन भी संतुष्ट हो जाता है.
खास मौकों बनता है ये पकवान
पहाड़ों में त्योहारों और खास मौकों पर पारंपरिक व्यंजन जरूर बनाए जाते हैं. इन व्यंजनों के साथ लोगों की भावनाएं और संस्कृति जुड़ी होती है. हर घर में मां-दादी के हाथ का बना खाना अपने आप में एक अलग स्वाद लिए होता है, जो यादों में हमेशा बना रहता है.
आज के समय में जब फास्ट फूड का चलन बढ़ रहा है, तब पहाड़ों का पारंपरिक स्वाद लोगों को फिर से अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. शहरों में रहने वाले लोग भी अब पहाड़ी खाने को पसंद करने लगे हैं, क्योंकि इसमें स्वाद के साथ-साथ सेहत भी छुपी होती है.
पहाड़ का खाना हमेशा खास
कह सकते हैं कि पहाड़ों का स्वाद सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वहां की संस्कृति, प्रकृति और जीवनशैली को भी दर्शाता है. यही वजह है कि पहाड़ का खाना हमेशा खास लगता है और दिल में अपनी अलग जगह बना लेता है.
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