गाजर कांजी रेसिपी: काली गाजर का कांजी सर्दियों में शरीर को गर्माहट देने और पाचन सुधारने वाला पारंपरिक व्यंजन है. इसमें ताज़ी काली गाजर और छाछ का इस्तेमाल होता है, जो पेट को हल्का रखता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है. हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार यह एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन-सी और फाइबर से भरपूर है, जिससे पाचन, वजन नियंत्रण और त्वचा की चमक भी बढ़ती है. इसे हल्के मसालों और तेल के साथ तैयार किया जाता है, इसलिए यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक भी है.
सर्दियों में शरीर को गर्माहट देने और पाचन को दुरुस्त रखने के लिए घरों में कई तरह के खास व्यंजन बनाए जाते हैं. इन्हीं में से एक है काली गाजर का कांजी, गाजर से बनने वाले हलवा तो सब जानते हैं, लेकिन काली गाजर से बनने वाला कांजी को बेहद कम लोग जानते हैं. यह कांजी जो स्वाद और सेहत दोनों में जबरदस्त होता है. यह व्यंजन खास तौर पर ग्रामीण परिवारों में लोकप्रिय है, जहां इसे ठंड के मौसम में नियमित रूप से बनाया जाता है. काली गाजर का कांजी खट्टा-नमकीन स्वाद वाला होता है और पेट को बेहद हल्का रखता है.

ग्रामीण विमला देवी ने एक बेहद स्वादिष्ट व्यंजन के बारे में बताया कि काली गाजर से उनके यहां गांव में कांजी बनाया जाता है. जिसे बनाने की विधि बेहद आसान है. सबसे पहले ताज़ी और काली गाजरें लेना है. इन्हें अच्छी तरह धोकर छील लें, ताकि मिट्टी या किसी भी तरह की धूल पूरी तरह हट जाए. अब गाजर को छीलने के बाद उसे गोल-गोल टुकड़ों में काट लिया जाता है. ये टुकड़े ही कांजयो का बेस बनाते हैं. अब एक साफ मटकी ले और उसमें कटे हुए गाजर के टुकड़े डालें. इसके ऊपर भरपूर मात्रा में छाछ डाल दिया जाता है. छाछ में खट्टापन होने के कारण गाजर धीरे-धीरे गलकर अपना खास कसैलापन छोड़ देती है. कुछ लोग इसमें हल्का-सा नमक और लाल मिर्च पाउडर भी डालते हैं, लेकिन पारंपरिक विधि में सिर्फ छाछ ही इस्तेमाल होता है.

जब मटकी में गाजर छाछ में अच्छी तरह गल जाए, तब जितनी सब्जी बनानी हो उतनी मात्रा मटकी से अलग निकाल लें. अब एक कढ़ाई में थोड़ा सा तेल गर्म करें. उसमें हल्का जीरा, राई या लहसुन डाल सकते है. अब छाछ में गली हुई गाजर डालकर धीमी आंच पर पकाएँ. कुछ ही मिनटों में यह खास स्वाद वाली सब्जी तैयार हो जाती है. इसे ही काली गाजर का कांजी कहा जाता है. सर्दियों की एकदम देसी, पौष्टिक और हल्की डिश.
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काली गाजर सिर्फ रंग में अलग नहीं होती, बल्कि उसके पोषक तत्व भी सामान्य गाजर से ज्यादा होते हैं. कांजी बनाने में छाछ भी इस्तेमाल होती है, जो इसके फायदे और बढ़ा देती है. हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर अंजु चौधरी के अनुसार यह पेट और पाचन के लिए बेहद फायदेमंद होता है. छाछ और गाजर मिलकर पाचन को मजबूत करते हैं. यह पेट को ठंडा रखता है और कब्ज को दूर करता है. इसी के साथ यह इम्यूनिटी बढ़ाता है. काली गाजर में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो सर्दियों में शरीर को संक्रमण से बचाते हैं.

काली गाजर का कांजयो शरीर को गर्माहट देता है. इसका स्वाद हल्का खट्टा और असर गर्म होता है. ठंड के मौसम में इसे खाने से शरीर में प्राकृतिक गर्माहट बनी रहती है. काली गाजर में मौजूद एंथोसायनिन खून को साफ करने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा साफ होती है और चेहरे पर ग्लो आता है. हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार इसका सेवन वजन घटाने में सहायक होता है. कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होने के कारण यह वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है. छाछ में गली हुई गाजर आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाती है, जिससे पाचन प्रक्रिया मजबूत होती है.

यह बिल्कुल हल्का, घरेलू और प्राकृतिक व्यंजन है. इसमें तेल और मसाले बहुत कम होते हैं. और शरीर को सर्दियों से सुरक्षा देने वाला पारंपरिक नुस्खा है. गांवों में इसे कमजोरी दूर करने और पाचन बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से खाया जाता है. यह एक परंपरागत सर्दियों की दवा जैसा है. यह स्वादिष्ट भी है, पौष्टिक भी, और शरीर को मौसम के अनुसार ढालने में मदद भी करता है.
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