रांची की अंजू और 10-15 महिलाओं की टीम ‘छोटू समोसा’ (2 इंच) बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं. यूट्यूब से सीखी गई इस रेसिपी में आलू की जगह मूंग दाल का उपयोग होता है, जिससे यह समोसा महीने भर खराब नहीं होता. ₹100 प्रति पैकेट बिकने वाले इस स्नैक की डिमांड अब दूसरे जिलों में भी बढ़ गई है.
अंजू बताती हैं कि इस सफर की शुरुआत किसी दूसरे के घर में ऐसे समोसे देखने के बाद हुई थी. उन्होंने इसे खुद बनाने का फैसला किया और इसके लिए यूट्यूब का सहारा लिया. हालांकि, सफलता पहली बार में नहीं मिली, करीब 50 से 60 बार की कोशिशों और कड़ी मेहनत के बाद वे इसका परफेक्ट स्वाद और आकार पाने में सफल रहीं.
समोसे में भरी जाती है दाल
इस समोसे की सबसे बड़ी खासियत इसकी शेल्फ लाइफ और स्टफिंग है. सामान्य समोसे जहां कुछ घंटों में खराब हो जाते हैं, वहीं यह ‘छोटू समोसा’ पूरे एक महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इसका कारण इसमें आलू के बजाय मूंग दाल और विभिन्न प्रकार की दालों के मिश्रण का उपयोग किया जाना है. आलू जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए दालों की फिलिंग इसे लंबे समय तक कुरकुरा और ताजा बनाए रखती है. दो बाइट में खाए जा सकने वाले इन समोसों की पैकेजिंग भी किसी नामी ब्रांड की तरह की जाती है, जिससे इनकी बाजार में अच्छी साख बन गई है.
आज आलम यह है कि अंजू और उनकी टीम रोजाना 20-25 पैकेट की सप्लाई करती है. एक पैकेट की कीमत लगभग ₹100 है और लोग अब किलो के हिसाब से फोन पर एडवांस ऑर्डर देने लगे हैं. मेहमानों के स्वागत के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहा है क्योंकि इसे पहले से स्टोर करके रखा जा सकता है. पूरी तरह हैंडमेड और शुद्ध सामग्री से तैयार यह समोसा अब सिर्फ रांची ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी मांग के अनुसार भेजा जा रहा है. यह पहल साबित करती है कि अगर सही दिशा में हुनर और तकनीक (यूट्यूब) का इस्तेमाल किया जाए, तो महिलाएं घर बैठे ही आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल पेश कर सकती हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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