इसलिए यह खासतौर पर जेपीएससी स्टूडेंट के बीच में काफी हिट है और बच्चे इनको बड़ा मानते हैं. विशाल ने लोकल 18 से खास बातचीत की और बताया कि मैं किसान परिवार से हूं पिताजी किसान है, बस खाना मिल जाता था दो टाइम यही हमारे लिए बड़ी बात होती थी. लेकिन पढ़ने का बड़ा मन था. कुछ पैसे इकट्ठे कर दिल्ली चला गया सोचा कि मैं भी यूपीएससी निकालूंगा. हालांकि, दो बार इंटरव्यू में भी पहुंचा, जेपीएससी के भी दो इंटरव्यू में पहुंचा पर नहीं हुआ. पर हां अनुभव जरूर मिला.
अनुभव को अपना हथियार बनाया
इसी अनुभव को अपना हथियार बनाया व स्टूडेंट को पढ़ाना शुरू किया. जब यह दोनों स्टूडेंट ने क्वालीफाई किया. इसके बाद उन्होंने ही दूसरे बच्चों को रिकमेंड किया. इस तरीके से 2 से 10 हुए 10 से, 20 और 200 और आज कुल मिलाकर 2000 तक पहुंच गए और पता भी ही नहीं चला. ये सिलसिला आज भी जारी है. ऑनलाइन मिलाकर आज हमारे साथ 5000 से अधिक स्टूडेंट जुड़े हुए हैं.
सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि, कनेक्शन है जरूरी
विशाल बताते हैं, हम रटा कर पढ़ाई नहीं करवाते, कोचिंग का यह काम नहीं होता है और न ही टीचर का यह काम होता है. टीचर का काम होता है बच्चों के साथ कनेक्शन बनाना. उनको समझना, उनकी कैपेबिलिटी को समझना कि वे क्या कर सकते हैं. मान लीजिए, मेरे पास कोई जीपीएससी का बच्चा आया तो कोई जरूरी नहीं कि वह जेपीएससी ही निकाले. क्या पता वह बैंकिंग सेक्टर में अच्छा काम करें, तो हम उसको वह भी कहते हैं कि तुम बैंकिंग में जाओ और वे क्रैक भी करते हैं.
कहने का मतलब है कि हम बच्चों के साथ एक रिलेशन बनाते है. यह देखते हैं कि उनकी समस्या क्या है. यहां पर हमारे पास जितने भी बच्चे आते हैं उन सबको मैं निजीतौर पर जानता हूं. उनके घर परिवार को जानता हूं, उनको कैरेक्टर को जानता हूं. इस लेवल पर बच्चों को जनता हू. तभी उसके लिए आप बढ़िया गाइड कर पाएंगे. उसको सही सलाह दे पाएंगे और यही मैं करता हूं.
पढ़ाना बड़ी बात नहीं, गाइडेंस बड़ी बात है
उन्होंने बताया कि पढ़ना बड़ी बात नहीं है. वह तो बच्चे भी 4 से 5 किताब आपसे बढ़िया पढ़कर बता देंगे. बढ़िया गाइडेंस सबसे ज्यादा जरूरी होता है. सही चीजों को सही समय पर बताना जरूरी होता है. बच्चों के फीलिंग को भी समझे कि वह अभी किस दौर से गुजर रहे हैं और उसको कैसे पढ़ाई के महत्व को समझाइये. तो इस लेवल पर आपको उतरना होगा व समझना होगा. तभी बच्चे आपसे कनेक्टेड फिल करेंगे, आपकी बातों को समझेंगे और तब पढ़ाई करेंगे. और यही हम करते है.
वह आगे बताते हैं, आज हमारी करोड़ों की कोचिंग है. इन बच्चों के वदौलत ही है. इसलिए अपना सारा समय यही पर देता हूं. यहां पर 12 घंटे, फिर घर में भी 6 घंटे, हर दिन 18 घंटे नॉन स्टॉप पढ़ाई. यही मेरा पिछले 15 साल से रूटीन रहा है.
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