झारखंड में नगर निकाय चुनाव की तैयारी तेज हो गई है. राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार फरवरी–मार्च में चुनाव हो सकते हैं. आयोग ने गाइडलाइन जारी करते हुए कहा है कि दो से अधिक बच्चों वाले प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे, यदि आखिरी बच्चा 9 फरवरी 2013 के बाद जन्मा हो. नामांकन में शपथ पत्र अनिवार्य होगा. चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे.
राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि नगर निकाय चुनाव में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. हालांकि यह नियम उन्हीं प्रत्याशियों पर लागू होगा, जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं और जिनका आखिरी बच्चा 9 फरवरी 2013 के बाद पैदा हुआ है. आयोग का मानना है कि यह नियम जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया गया है.
शपथ पत्र देना अनिवार्य
चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि नामांकन के समय सभी प्रत्याशियों को शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा. शपथ पत्र में उम्मीदवारों को अपनी पारिवारिक स्थिति, संपत्ति, आपराधिक मामलों और अन्य जरूरी जानकारियां देनी होंगी. इसके अलावा जिन प्रत्याशियों पर नगर निकाय का कोई टैक्स, शुल्क या किराया बकाया है, वे भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. पहले उन्हें अपना बकाया चुकाना होगा.
इन अधिकारियों को जिम्मेदारी
नगर निकाय चुनाव में एसडीओ को निर्वाची पदाधिकारी बनाया गया है, जबकि बीडीओ और सीओ सहायक निर्वाची पदाधिकारी की भूमिका निभाएंगे. चुनाव की प्रक्रिया बैलेट पेपर के माध्यम से कराई जाएगी, यानी इस बार ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होगा.
जल्द होगा तारीखों का ऐलान
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मेयर और नगर परिषद अध्यक्ष पद के आरक्षण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी जारी है. आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा की जाएगी. कुल मिलाकर झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर प्रशासनिक और कानूनी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. चुनाव आयोग की सख्त गाइडलाइन के चलते इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों की संख्या और उनकी पात्रता पर खास नजर रखी जाएगी. इससे साफ है कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में नगर निकाय चुनाव को लेकर गतिविधियां और तेज होंगी.
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