गांवों में गौवंशों के संरक्षण, उन्हें गौचर में ले जाने के लिए गांव ग्वाल योजना की शुरूआत रामगंजमंडी से हुई। श्री राम स्नेही संप्रदाय, शाहपुरा पीठ के जगतगुरु स्वामी रामदयाल महाराज और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर की मौजूदगी में इस योजना की शुरूआत की गई। चेचट तहसील के खेड़ली गांव से इस योजना की शुरूआत की जा रही है। योजना के तहत हर चयनित गांव में एक गांव ग्वाला नियुक्त किया जाएगा, जिसे हर महीने सैलरी भी दी जाएगी। यह ग्वाला गांव के गौवंशों को सामूहिक रूप से गोचर भूमि तक चराने ले जाएगा और शाम को वापस गांव में लाकर उनके मालिकों तक पहुंचाएगा। रामगंजमंडी क्षेत्र में शुरूआत में 14 गांव ग्वाल तैयार किए गए हैं। इनका मंत्री मदन दिलावर ने मंच पर माला और साफा पहनाकर स्वागत किया। मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि योजना का उद्देश्य गोपालन को संगठित स्वरूप देना, गोचर भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना तथा ग्रामीण रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है। दिलावर ने कहा कि आज के समय चारागाह की जमीनों पर अतिक्रमण हो चुके है। लोग अपने गौवंशों को चारागाह भूमि पर चराने के लिए नहीं लेकर जाते हैं। ऐसे में लोगों ने इन जमीनों पर कब्जे कर लिया है। विशेषज्ञों और अनुभवी गोवंश पालकों से चर्चा कर प्राचीन परंपरा गांव ग्वाल को फिर से शुरू किया जा रहा है। आजादी से पूर्व तक बल्कि यह कहे की वर्तमान सें दो-तीन दशक पूर्व तक पूरे भारत में ग्रामीण अंचल में यह परंपरा प्रचलन में थी। गांव की सभी गोवंश को गांव का ही व्यक्ति एक साथ ले जाता था और दिन भर गायों को चरा कर शाम में वापस गांव मे ले आता था। इस काम के बदले गौपालक उस गाय चराने ले जाने वाले को गेहूं दिया करते थे। ग्रामीण अंचलों में यह व्यवस्था समाप्त हो गई। अब लोग गौवंशों को खुला छोड़ देते हैं। जिससे सड़कों पर हादसे भी होते है। इस योजना में प्रत्येक गांव में एक व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा, जो प्रतिदिन सुबह गांव की सभी गायों को चराने के लिए चारागाह भूमि पर लेकर जाएगा।
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