सऊदी अरब में संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाले बालोतरा जिले के मेघवालों की ढाणी निवासी 19 वर्षीय रमेश कुमार मेघवाल की पार्थिव देह आखिरकार 36 दिन बाद भारत लौटने जा रही है। लंबा इंतजार, कानूनी लड़ाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद गुरुवार को रमेश की देह सऊदी अरब से जयपुर पहुंचेगी, जिससे परिजनों को कुछ हद तक राहत मिली है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रमेश कुमार की पार्थिव देह 18 दिसंबर की रात 12:05 बजे सऊदी अरब से रवाना होकर नई दिल्ली होते हुए गुरुवार दोपहर 1:25 बजे जयपुर एयरपोर्ट पहुंचेगी। इसके बाद सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल की ओर से की गई व्यवस्था के तहत एंबुलेंस के माध्यम से पार्थिव देह को जयपुर से बालोतरा स्थित मेघवालों की ढाणी लाया जाएगा।
इस पूरे मामले में राष्ट्रपति सचिवालय में याचिका दायर करने वाले राजस्थान बीज निगम के पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि लगातार प्रयासों और न्यायिक हस्तक्षेप के चलते आखिरकार सऊदी सरकार से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो सकीं। जयपुर एयरपोर्ट से पार्थिव देह लेने के लिए बालोतरा से रमेश के भाई गैनाराम मेघवाल, चचेरे भाई गजाराम मेघवाल, परिवार के सदस्य मोटाराम, देवाराम और सुखदेव बुधवार शाम जयपुर के लिए रवाना हो चुके हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती बनी निर्णायक
इस मामले को लेकर बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में सुनवाई हुई, जहां गुरुवार को पुनः सुनवाई निर्धारित की गई है। रमेश की मां तीजू देवी की ओर से 10 दिसंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें पार्थिव देह को भारत लाने और मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की मांग की गई थी।
जस्टिस नूपुर भाटी ने 11 दिसंबर को मामले को गंभीर मानते हुए किंगडम ऑफ सऊदी अरब के दूतावास, नई दिल्ली को नोटिस जारी किया था। साथ ही भारत सरकार और राजस्थान सरकार से भी जवाब तलब किया गया। हाईकोर्ट के नोटिस के बाद सऊदी प्रशासन हरकत में आया और दिवंगत की देह भारतीय दूतावास को सौंप दी गई। इसके पश्चात सभी आवश्यक एनओसी जारी कर दी गईं।
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रोजगार की तलाश में गया था सऊदी अरब
उल्लेखनीय है कि रमेश कुमार 11 अक्टूबर को बेहतर भविष्य और रोजगार की उम्मीद में सऊदी अरब गया था। महज एक महीने बाद 13 नवंबर 2025 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। अचानक आई इस खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। पार्थिव देह भारत नहीं पहुंचने के कारण परिजन लगातार जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और न्यायालय के चक्कर लगाते रहे। अब 36 दिन बाद रमेश की देह के वतन लौटने की सूचना से गांव में शोक के साथ-साथ एक भावुक माहौल है। परिजन अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए हैं, वहीं पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी लगातार उठ रही है।
यह मामला न केवल एक परिवार के दर्द की कहानी है, बल्कि विदेशों में काम करने गए युवाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
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