वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में मोर्चे पर दुश्मन का डटकर सामना करने वाले 6 कुमाऊं रेजिमेंट के जांबाज सिपाही राम सिंह महरा का सोमवार को निधन हो गया। क्षेत्र के ग्राम जीवल निवासी पूर्व सैनिक राम सिंह ने 99 वर्ष की आयु में अपने पैतृक आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है।
वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान राम सिंह महरा ने मोर्चे पर दुश्मन का डटकर मुकाबला किया। इस दौरान उनके पेट में गोली लगी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दुश्मनों पर गोलियां बरसाते रहे। सेवानिवृत्ति के बाद वह जनसंघ से जुड़े और सामाजिक कार्यों में भागीदारी निभाते रहे। वह भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को रामेश्वर घाट पर किया जाएगा।
उनके निधन पर क्षेत्रीय विधायक फकीर राम टम्टा, पूर्व विधायक मीना गंगोला, युवा मोर्चा के कुमाऊं सह संयोजक दीपक उप्रेती, अनु. जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष भूपाल आर्या सहित पालिकाध्यक्ष विमल रावल, नीरज पंत, लिखित पंत, रविंद्र लाल वर्मा, दयाल कुमार आदि ने शोक व्यक्त किया है।
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