मंदिर में श्रद्धालु बेलपत्र, दूध, धतूरा, पुष्प और फल अर्पित कर भोलेनाथ का अभिषेक कर रहे हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर यहां पहली बार श्रीराम कथा, रुद्र महायज्ञ और रुद्राभिषेक का भव्य आयोजन किया जा रहा है। 7 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह धार्मिक अनुष्ठान 16 फरवरी तक चलेगा। हरिद्वार के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित संतोष उपाध्याय प्रतिदिन श्रीराम कथा का वाचन कर रहे हैं, जिसे सुनने दूर-दूर से भक्त पहुंच रहे हैं।
चारों प्रहर रुद्राष्टाध्यायी पाठ के साथ महाभिषेक किया जा रहा है। मंदिर समिति के अनुसार, इस प्राचीन शिवलिंग पर महाशिवरात्रि के दिन पूजा-अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ब्रह्मचारी महाराज ने वर्ष 1930 में इस मंदिर की स्थापना की थी। उनकी प्रतिमा आज भी मंदिर परिसर में स्थापित है और श्रद्धालु वहां मन्नत मांगते हैं।
भविष्यवाणी से जुड़ी हवाई पट्टी की कहानी
यह शिवालय 100 वर्ष से अधिक पुराना बताया जाता है। पूर्व में यहां की भूमि बंजर थी। समय के साथ साधु-संतों के आगमन से यहां आबादी बसनी शुरू हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, ब्रह्मचारी महाराज उच्च कोटि के संत थे और क्षेत्रवासियों से उनका गहरा जुड़ाव था।
पंचायत समिति के पूर्व उपप्रधान सुरेंद्र जलंधरा के अनुसार, ब्रह्मचारी महाराज ने मंदिर के पास बंजर भूमि पर खड़े होकर मिट्टी सूंघते हुए भविष्यवाणी की थी कि यहां “उड़न खटोले” यानी विमान उड़ेंगे। बाद में यहां लालगढ़ जाटान में हवाई पट्टी का निर्माण हुआ और उनकी भविष्यवाणी साकार मानी गई। एक समय इस हवाई पट्टी से जयपुर, दिल्ली और मुंबई के लिए उड़ानें संचालित होती थीं। यहां तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सहित कई बड़े नेता भी आए। हालांकि 7 अगस्त 2018 को एक विमान हादसे के बाद यहां से उड़ानें बंद हो गईं।
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2018 विमान हादसा और ‘चमत्कार’ की मान्यता
वर्ष 2018 में सुप्रीम एविएशन का एक सीस्ना ग्रैंड कारवां विमान लैंडिंग के दौरान रनवे पर नियंत्रण खो बैठा और बाउंड्री वॉल से टकरा गया। विमान में सात यात्री और दो क्रू सदस्य सवार थे। हादसे में बड़ा नुकसान टल गया और सभी सुरक्षित बच गए। स्थानीय लोग इसे ब्रह्मचारी महाराज की कृपा और चमत्कार से जोड़कर देखते हैं।
हर वर्ष महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेला आयोजित होता है। ब्रह्मचारी महाराज की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धालु मन्नत मांगते हैं। श्रद्धा, आस्था और लोकमान्यताओं से जुड़ा यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक पहचान बना हुआ है।
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