प्रदेश में सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ ने नागौर और डीडवाना-कुचामन जिलों में मौसम का परिदृश्य पूरी तरह बदल कर रख दिया है। पिछले कई दिनों से मरुधरा के इस क्षेत्र में जहां चटख धूप खिली हुई थी, वहीं अब आसमान में बादलों के डेरे के साथ ही सीजन की पहली मावठ ने दस्तक दे दी है। इस बदलाव की शुरुआत कल शाम से ही दिखने लगी थी जब दोनों जिलों में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। रात ढलते-ढलते नागौर के थांवला और डीडवाना जिला मुख्यालय पर बूंदाबांदी का दौर शुरू हुआ जो रुक-रुक कर सुबह तक जारी रहा। इसके अलावा नागौर के मुंडवा, सांजू, कुचेरा और मेड़ता सहित डीडवाना के परबतसर व मौलासर में भी रिमझिम बारिश दर्ज की गई, जिससे अचानक जनजीवन में ठंडक घुल गई। कड़ाके की ठंड और तापमान में भारी गिरावट मौसम के इस तीखे पलटाव का सबसे बड़ा असर पारे पर देखने को मिला है। पिछले दो सप्ताह से जो अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ था, वह अचानक 10 डिग्री लुढ़ककर 18 डिग्री सेल्सियस पर सिमट गया है। सर्द हवाओं और हल्की बारिश के मेल ने पूरे क्षेत्र को ठिठुरन की आगोश में ले लिया है। मौसम विभाग ने ठंड के और अधिक गहराने के संकेत दिए हैं। जहां कल रात का न्यूनतम तापमान 8.7 डिग्री था, वहीं आज रात इसके गिरकर 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। विभाग ने दोनों ही जिलों के लिए बारिश और मेघगर्जन का येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को बदलते मौसम के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। किसानों के लिए अमृत बनी बारिश से खिले चेहरे कृषि विशेषज्ञों और क्षेत्र के किसानों की मानें तो यह मावठ खेती के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे अन्नदाताओं के चेहरे इस बूंदाबांदी के बाद खिल उठे हैं। रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं, सरसों और चने के लिए यह आसमानी पानी अमृत का काम करेगा, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार में बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि वर्तमान में हुई बारिश को किसान अभी पर्याप्त नहीं मान रहे हैं और बेहतर पैदावार के लिए और अधिक अच्छी मावठ की आस लगाए बैठे हैं। फिलहाल, बदले हुए मौसम ने न केवल खेतों में नई उम्मीद जगाई है, बल्कि बाजार और आम रास्तों पर भी लोगों को गरम कपड़ों में लिपटे रहने को मजबूर कर दिया है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.