राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट–1 में आपने पढ़ा चूरू के सरदारशहर के गांव में सनसनी फैल जाती है। मितासर गांव के बाहर 24 फरवरी 1974 को सुबह दस बजे के करीब एक संकरे रास्ते पर किसी का शव पड़ा होता है। गांव में रहने वाली मुसमत तक बात पहुंचती है तो वह बेचैन
वह अनहोनी की आशंका के साथ उस स्थान पर पहुंचती है। आशंका सच साबित होती है। शव उसके पति का ही होता है। पति रामू राम का भाई सूरजाराम मुसमत से पूछता है तो वह बताती है कि रात में रामूराम का दोस्त मोहन व कुछ लोग घर आए थे। सुरजाराम पुलिस को यह सब बताता है। पुलिस हत्या का मामला दर्ज कर 28 फरवरी को मोहन व उसके साथ बालमुकंद, दुलीचंद, यासिन और बलवीर को हिरासत में लेती है।
अब आगे की कहानी…
पति का शव देखते ही पत्नी बेसुध हो गई। -एआई इमेज
पांचों आरोपियों से पुलिस सख्ती से पूछताछ करती है तो वे हत्या की बात कबूल लेते हैं। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस वारदात में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लेती है।
4 मार्च को सभी आराेपियों की शिनाख्त परेड करवाई जाती है, जिसमें मृतक रामृ की पत्नी मुसमत आरोपियों को पहचान लेती है।
पुलिस जांच में सामने आता है कि रामू राम की हत्या की साजिश उसके ही दोस्त मोहन ने रची थी। उसी ने धारदार हथियार से रामूराम पर हमला किया था। मामले में एक आरोपी बालमुकुंद सरकारी गवाह बनने को तैयार हो जाता है।
बयान में बालमुकुंद ने बताया कि हत्या से एक माह पहले जनवरी में वह, मोहन, यासिन, दुलीचंद और तीन अन्य व्यक्ति प्रणव रंजन, राजू सोनी व कमल भौमिक पार्क में बैठे थे। सभी ने मिलकर डकैती का प्लान किया।
मोहन ने बताया कि मितासर गांव निवासी उसके दोस्त व रिश्तेदार रामू राम के पास खूब पैसा और चांदी है। मोहन ने रामू राम से पैसा लूटने व हत्या का प्लान किया।
20 फरवरी 1974 को शिवरात्रि के दिन मोहन, दुलीचंद, बालमुकंद, बलबीर सिंह, प्रणाद रंजन और कमल सभी जॉनसन बल्ब की फैक्ट्री स्थित कमल भौमिक के कमरे में राजू सोनी की शादी का जश्न मना रहे थे।
सभी ने शराब पी रखी थी। राजू सोनी ने ज्यादा पी रखी थी। वह रुम पर ही रुका, लेकिन मोहन, यासिन, दुली चंद, बालमुकंद व बलवीर सिंह कमरे से बाहर निकले और मितासर जाकर मोहन के दोस्त रामू राम को मारने का प्लान किया।

हत्यारों ने शराब पार्टी की और इसी दौरान रामूराम की हत्या का प्लान बनाया। -एआई इमेज
सभी नशे में थे। फैक्ट्री के बाहर आए तो एक कार पड़ी थी। उसे स्टार्ट करने की कोशिश की। उस समय वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति को लूटने की कोशिश की, लेकिन उसके पास से कुछ नहीं मिला।
एक घंटे यहां वहां घूमने के बाद बालमुकंद व और यासिन अपने घर चले गए। मोहन, बलवीर व दुली चंद रामू के घर गए। रामू की पत्नी ने तीनों को चाय पिलाई थी। ऐसे में उन्होंने रामू के घर में लूट नहीं की और यह कह कर आए कि एक दो दिन में चीनी का ट्रक आने वाला है, उसका सौदा करना हैं, पैसा तैयार रखना।
23 फरवरी की शाम 6 बजे सभी मोहन के घर पर इकट्ठा हुए, मोहन के घर खाना खाकर फिर रामू को लूटने की योजना बनाई। तीन साइकिल पर पांच लोग सवार होकर मितासर गांव गए। मोहन ने रामू पर हमला करने के लिए उकसाया था।
गांव के बाहर पहुंचते ही बालमुकंद, यासिन व दुलीचंद रुक गए और मोहन व बलवीर को रामू के घर जाने और उसे साथ गांव के बाहर लाने को कहा। मोहन और बलवीर रामू के घर पहुंचे और चाय पीकर मोहन ने रामू से कहा कि गांव के बाहर चीनी से लदा ट्रक खड़ा हैं, पैसे लेकर साथ चले और सौदा कर ले। इस पर रामू 200 रुपए लेकर साथ चला।

हत्यारे पहले रामूराम के घर गए थे। चीनी के सौदे के बहाने उसे अपने साथ ले गए। -एआई इमेज
वहां पहुंचते ही रामू को घेर लिया और बलवीर ने रामू को पकड़ा। दूलीचंद ने लाठी से वार किया। मोहन ने रामू का धारदार हथियार से गला काटने की कोशिश की। गला रेतने में यासिन ने उसका साथ दिया। बालमुकुंद ने रामू के पैर पकड़ रखे थे। उसने जब गले से खून बहता देखा तब बेचैनी हुई और चिल्लाया कि गांव के तरफ से कोई रोशनी आ रही है।
इस पर हड़बड़ी में सभी वहां से भागे। मोहन ने रामू की जेब से 200 रुपए निकाल लिए थे। भागते समय मुख्य सड़क पर दो व्यक्ति मिले जो पास के गांव से थे। उन्होंने जब मोहन से पूछा रात में कहा से आ रहे हो तब मोहन ने बताया कि बैंक के काम से शहर गए थे, वहीं से लौट रहे हैं। इसके बाद पांचों तीन साइकिल पर अलग अलग दिशा से सरदारशहर लौट गए।
बालमुकंद की इस बयान के बाद व गवाहों के आधार पर 11 अक्टूबर 1985 को सत्र न्यायाधीश ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सत्र न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जोधपुर में जस्टिस जी एन रे व फैजान उद्दीन की डबल बेंच में याचिका दायर की। 15 जनवरी 1997 को हाईकोर्ट ने आरेापियों की याचिका को खारिज कर दिया और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी।

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