राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने रणथंभौर क्षेत्र की 208 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन गतिविधियां दोबारा शुरू करने की मांग से जुड़े मामले में सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। यह सुनवाई एम.ए. संख्या 10/2026 (मूल आवेदन संख्या 431/2016, बाबू लाल जाजू बनाम भारत संघ एवं अन्य) में हुई। प्रधान पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने की, जबकि विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल भी पीठ में शामिल रहे। आवेदक की ओर से वर्ष 2017 के आदेश में संशोधन की मांग की गई।
गौरतलब है कि अधिकरण ने 11 अक्टूबर 2017 के अपने आदेश में 208 हेक्टेयर वन भूमि तथा रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के अभयारण्य/बफर जोन में स्थित 201 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी थी।
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आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि वर्ष 2017 के आदेश के बाद सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त कर ली गई हैं। इनमें वन (संरक्षण) अधिनियम की धारा 2 के तहत वन भूमि विचलन की अनुमति तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 29 के अंतर्गत 9 जून 2025 को प्राप्त स्वीकृति शामिल है। अधिवक्ता का कहना है कि पूर्व आदेश में दी गई स्वतंत्रता के अनुरूप अब 208 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन कार्य पुनः शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
अधिकरण ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले ई-फाइलिंग के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। साथ ही, आवेदक को सभी पक्षकारों को नोटिस की सेवा सुनिश्चित कर उसका शपथपत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 25 मई 2026 को निर्धारित की गई है।
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