राजस्थान के नवनिर्मित जिले खैरथल-तिजारा के जिला कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक पीड़ित कर्मचारी ने व्यवस्था से तंग आकर विरोध का सबसे चरम रास्ता चुना। जब कलेक्ट्रेट में आम दिनों की तरह कामकाज चल रहा था, एक कर्मचारी अचानक मुख्य द्वार के पास पहुंचा और कड़ाके की ठंड के बावजूद अपने कपड़े उतारकर निर्वस्त्र हो गया।
पीड़ित का आरोप है कि वह लंबे समय से अपनी लंबित मांगों और अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कथित उत्पीड़न से परेशान है। लेकिन बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उसकी सुनवाई नहीं हो रही थी।
‘अंधा-बहरा है शासन’
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कलेक्ट्रेट के सामने पहुंचते ही कर्मचारी के चेहरे पर गहरा आक्रोश और पीड़ा साफ झलक रही थी। उसके हाथ में कुछ आधिकारिक दस्तावेज और एक ज्ञापन था। हवा में दस्तावेज लहराते हुए उसने चिल्लाकर कहा कि जब शासन अंधा और बहरा हो जाए, तो आम आदमी के पास अपना सम्मान दांव पर लगाने के अलावा कुछ नहीं बचता। इतना कहते ही उसने विरोध स्वरूप अपने कपड़े उतार दिए और जमीन पर बैठ गया। शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बावजूद कर्मचारी वहां डटा रहा और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद नागरिक और अन्य कर्मचारी स्तब्ध रह गए। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।
पुलिस और प्रशासन में मची अफरातफरी
घटना की सूचना मिलते ही कलेक्ट्रेट परिसर में तैनात पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए। सार्वजनिक रूप से निर्वस्त्र होकर विरोध प्रदर्शन की खबर ने विभाग के हाथ-पांव फुला दिए। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी कंबल और कपड़े लेकर पीड़ित को ढकने के लिए दौड़े।
हालांकि, कर्मचारी का गुस्सा इस कदर था कि उसने शुरुआत में किसी को भी पास आने से मना कर दिया। उसने दो-टूक कहा कि उसे कंबल की नहीं, बल्कि न्याय की जरूरत है। काफी देर तक चले ड्रामे और समझाइश के बाद, पुलिस ने उसे घेरकर कपड़े पहनाए और हिरासत में लेकर कलेक्ट्रेट के भीतर ले गई।
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, उठे सवाल
इस पूरी घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में कर्मचारी काफी भावुक नजर आ रहा है। वहीं, भीड़ में खड़े लोग प्रशासन की कार्यप्रणाली की आलोचना करते देखे जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी को जिला मुख्यालय पर इस तरह का कदम उठाना पड़ रहा है, तो यह सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।
क्या है विवाद की मुख्य जड़?
सूत्रों के अनुसार, यह विवाद कर्मचारी के रुके हुए वेतन या पदोन्नति से जुड़ा हो सकता है। चर्चा यह भी है कि पीड़ित पिछले कई महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहा था, लेकिन उसकी फाइल को कथित तौर पर दबाया जा रहा था। हालांकि, जिला प्रशासन ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। खबर है कि घटना के बाद उच्च अधिकारियों ने आनन-फानन में पीड़ित की फाइल तलब की है और मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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