केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राजस्थान के राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों में फैले कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना के तहत अभयारण्य की सीमा के आसपास शून्य से एक किलोमीटर तक के क्षेत्र को ‘कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य पारिस्थितिकी संवेदी जोन’ (ESZ) घोषित कर दिया गया है। इस अधिसूचना के जारी होने के साथ ही कुंभलगढ़ अभ्यारण्य में लक्ष्मण रेखा खिंच गई है जिससे अब यहां परिस्थिति तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी तरह की वाणिज्यिक गतिविधियां नहीं चलाई जा सकेंगी।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए कड़े कदम इस कदम का मुख्य उद्देश्य अरावली पर्वतमाला के इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और यहाँ की समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित करना है । कुंभलगढ़ का यह क्षेत्र देश के दो प्रमुख जलग्रहण क्षेत्रों के बीच विभाजन रेखा बनाता है, जहाँ से बनास नदी और लूनी की सहायक नदियाँ (सुकड़ी, मिठड़ी आदि) निकलती हैं ।
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<p><strong>क्या प्रतिबंधित रहेगा (Prohibited Activities):</strong> अधिसूचना के अनुसार, इको-सेंसिटिव जोन में निम्नलिखित गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है:
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<strong>वाणिज्यिक खनन और पत्थर उत्खनन:</strong> स्थानीय निवासियों की घरेलू जरूरतों (घरों के निर्माण/मरम्मत) को छोड़कर सभी नए और मौजूदा खनन कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा ।
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<strong>प्रदूषणकारी उद्योग:</strong> किसी भी प्रकार के नए प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना या पुराने उद्योगों के विस्तार की अनुमति नहीं होगी ।
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<strong>अन्य प्रतिबंध:</strong> बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं, आरा मिलों, ईंट भट्टों, और जलावन लकड़ी के वाणिज्यिक उपयोग पर भी पूरी तरह रोक रहेगी ।
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<strong>पर्यटन की गतिविधियां चल सकेंगी :</strong> संरक्षित क्षेत्र की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर नए होटल या रिसॉर्ट का निर्माण नहीं किया जा सकेगा । हालांकि, इस सीमा के बाहर पर्यटन महायोजना के अनुसार विस्तार की अनुमति दी जा सकेगी ।
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