‘सेव अरावली’ अभियान के बाद अब कांग्रेस ने मनरेगा के नए कानून के खिलाफ राजस्थान में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। प्रदेश में मनरेगा के विरोध में कांग्रेस के धरना-प्रदर्शनों की शुरुआत हो चुकी है, वहीं इस मुद्दे को लेकर पार्टी ने 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी आंदोलन भी शुरू कर दिया है।
राजस्थान में आंदोलन को संगठित और प्रभावी बनाने के लिए कांग्रेस ने एक को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया है। वरिष्ठ नेता सीपी जोशी को इस कमेटी का कन्वीनर बनाया गया है। कमेटी में मुरारी मीणा, उम्मेदाराम बेनीवाल, अशोक चांदना, रोहित बोहरा, गणेश घोघरा, हाकम अली खान, बाबूलाल नागर, डूंगरराम गेदर और वैभव गहलोत को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पार्टी नेतृत्व के अनुसार यह कमेटी पूरे प्रदेश में आंदोलन की रणनीति तय करने और समन्वय स्थापित करने का कार्य करेगी।
कांग्रेस ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक मनरेगा के नए कानून को वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी कड़ी में रविवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कई घंटों तक उपवास पर बैठे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।
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इस उपवास कार्यक्रम में पार्टी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा मौजूद रहे। यह आयोजन जयपुर शहर, जयपुर देहात पूर्व और जयपुर देहात पश्चिम जिला कांग्रेस कमेटियों के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। उपवास के दौरान किसी तरह की भाषणबाजी नहीं हुई और रामधुनी के साथ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया।
मीडिया से बातचीत में कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा के नए कानून में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे मजदूरों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह कानून गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के हितों के खिलाफ है और इसी वजह से पार्टी इसे लेकर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।
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