राजस्थान विधानसभा में सोमवार को बायतु विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चौधरी ने कार्य संचालन नियम–50 के अंतर्गत स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत कर बालोतरा स्थित एमबीआर राजकीय पीजी महाविद्यालय की भूमि के एक हिस्से को अन्य सरकारी कार्यालयों के निर्माण हेतु आवंटित किए जाने के निर्णय का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि यह विषय हजारों विद्यार्थियों की शिक्षा और क्षेत्र के शैक्षणिक भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर तत्काल चर्चा आवश्यक है।
भूमि आवंटन का विवरण
विधायक हरीश चौधरी ने सदन को अवगत कराया कि महाविद्यालय की कुल लगभग 85 बीघा भूमि में से करीब 29 बीघा भूमि अन्य सरकारी प्रयोजनों के लिए प्रस्तावित या आवंटित की गई है। उनके अनुसार, इसमें से लगभग 24 बीघा भूमि परिसर की चारदीवारी के भीतर स्थित है, जिसे खेल मैदान के लिए सुरक्षित माना जाता है। इसके अतिरिक्त लगभग 5 बीघा भूमि परिसर के बाहर सड़क मार्ग के निकट बताई जा रही है, जिसे भी प्रस्तावित आवंटन में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की भूमि केवल वर्तमान उपयोग तक सीमित नहीं होती, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित रखी जाती है। ऐसे में बड़े हिस्से के आवंटन से संस्थान के दीर्घकालिक विकास पर प्रभाव पड़ सकता है।
शैक्षणिक विस्तार पर संभावित प्रभाव
विधायक ने सदन में कहा कि बढ़ती छात्रसंख्या, नए संकायों की स्थापना और आधुनिक प्रयोगशालाओं के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि की आवश्यकता होती है। उन्होंने उल्लेख किया कि खेल सुविधाओं का विस्तार, एनसीसी इकाई की स्थापना तथा कृषि एवं विधि जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए भी परिसर का विस्तृत होना जरूरी है।
उनका कहना था कि यदि वर्तमान में भूमि का बड़ा हिस्सा अन्य प्रयोजनों के लिए दे दिया जाता है, तो भविष्य में शैक्षणिक विस्तार की संभावनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पर्याप्त परिसर, खेल मैदान और आवश्यक शैक्षणिक अवसंरचना अनिवार्य मानी जाती है।
अन्य भूमि की उपलब्धता का सवाल
हरीश चौधरी ने यह भी कहा कि बालोतरा मुख्यालय के आसपास अन्य सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद महाविद्यालय परिसर की भूमि का चयन किया जाना पुनर्विचार योग्य है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस निर्णय के औचित्य पर दोबारा विचार किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि शैक्षणिक संस्थान की भूमि पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
छात्रों का आंदोलन और क्षेत्रीय स्थिति
विधायक ने सदन को अवगत कराया कि वर्तमान में छात्र समुदाय इस निर्णय के विरोध में लगातार आंदोलन कर रहा है। उनके अनुसार, इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह केवल भूमि का मामला नहीं है, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और क्षेत्र के समग्र शैक्षणिक विकास से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने सरकार से मांग की कि विद्यार्थियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए तथा संबंधित विभाग को निर्देश जारी कर महाविद्यालय की समस्त भूमि को यथावत सुरक्षित रखा जाए।
भविष्य की पीढ़ियों का प्रश्न
विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान हरीश चौधरी ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमि की सुरक्षा केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की शैक्षणिक बाधा उत्पन्न न हो।
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