इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ में सुरक्षा एजेंसियां और अधिक अलर्ट हो गई हैं, क्योंकि डिप्टी सीएम ने 31 मार्च तक नक्सलवाद समाप्त होने का लक्ष्य रखा है. शर्मा ने कहा कि अब संगठन में एक-दो व्यक्ति ही बचे हैं, जिनकी सक्रियता पहले जैसी नहीं है. तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की संयुक्त कार्रवाई से यह संभव हुआ है. मल्ला राजू रेड्डी जैसे सीनियर नक्सली का सरेंडर नक्सल आंदोलन के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि वह क्षेत्र में रणनीति बनाने में माहिर था. यह सरेंडर सरकार की आत्मसमर्पण नीति का फल है, जहां नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रोत्साहन दिए जाते हैं. छत्तीसगढ़ में 2023 से अब तक 200 से अधिक नक्सली सरेंडर कर चुके हैं, जो राज्य की प्रगति में योगदान दे रहे हैं.
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