राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा है कि हिमाचल को बचाना है तो नशे को भगाना पड़ेगा। राज्यपाल सोमवार को रामपुर के नोगली में सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा महाविद्यालय में स्नातक पाठ्यक्रम के उद्घाटन समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षक और प्रशिक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में शिक्षक का भाव भरा जा सकता है। लेकिन प्रशिक्षण भारतीय स्वरूप के अनुरूप चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छा शिक्षक ही उत्तम विद्यार्थियों को तैयार करने की जिम्मेदारी रखता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में गुणात्मक शिक्षा प्रदान करना अधिक महत्वपूर्ण है। शिक्षण संस्थान केवल भवन से नहीं बल्कि वहां कैसी शिक्षा मिल रही है और प्रतिभाओं को किस प्रकार संवारा जा रहा है, यह अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाने पर बल दिया और कहा की नई शिक्षा नीति हमें अपने महापुरुषों को याद करने का अवसर देती है। इससे पूर्व स्थानीय किसानों ने राज्यपाल का फलों से तोल कर स्वागत किया।
बोले, टीबी के बढ़ते मामले चिंता का विषय
रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश को 2024 तक टीबी मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन टीवी रोगियों के आंकड़े घटने की बजाय कैसे बढ़ गए, यह चिंता का विषय है। इसके लिए हमने अपने कर्तव्य का सही तरीके से पालन नहीं किया, जिसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। टीबी उन्मूलन के लिए ईमानदारी से प्रयास किए जाने जरूरी हैं। यह बात राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने उपमंडल रामपुर में क्षय रोग उन्मूलन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। राज्यपाल ने आनी और निरमंड ब्लॉक के टीबी रोगियों को पोषण किट वितरित की। राज्य के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के टेक्निकल कंसल्टेंट डॉ. निशांत सोनी ने पावर पॉइंट के माध्यम से प्रदेश में टीबी की वस्तुस्थिति से अवगत करवाया।
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