मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए पंजाब पूरी तरह से तैयार है। चुनाव आयोग ने वर्ष 2003 मतदाता सूची के साथ मौजूदा मतदाता सूची के मिलान का 50 फीसदी काम पूरा कर लिया है और बाकी का काम इसी माह के अंदर पूरा कर लिया जाएगा।
अभी फिलहाल देश के कई राज्यों में दूसरे फेज के तहत एसआईआर का काम चल रहा है। तीसरे फेज के अंदर प्रदेश में भी एसआईआर की घोषणा की जा सकती है। पंजाब की करीब 3 करोड़ जनसंख्या है जबकि लगभग 2.14 करोड़ मतदाता हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंजाब के अनुसार एसआईआर के लिए सभी तरह की तैयारी पूरी कर ली गई है। मतदाता सूची के मिलान का काम चल रहा है और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी तेजी से इस काम को पूरा करने में लगे हुए हैं।
बूथ स्तर के अधिकारियों और उनके पर्यवेक्षकों को जारी निर्देशानुसार सटीकता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन का काम विभिन्न भागों में बांटा गया है। इनमें उनकी जन्मतिथि चेक की जा रही है। साथ ही जिन मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है पर उनके माता-पिता, दादा-दादी का नाम तब मतदाता सूची में शामिल था, इसलिए उनका भी मिलान किया जा रहा है।
अगर मतदाता को यह जानकारी नहीं है कि वर्ष 2003 के दौरान उनके माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों का नाम किस विधानसभा में दर्ज था तो वे आयोग की वेबसाइट पर जाकर इसे चेक कर सकते हैं। सत्यापन के दौरान प्रत्येक श्रेणी के लिए विशिष्ट दस्तावेजों की आवश्यकता है जिनमें माता-पिता के दस्तावेज भी शामिल हैं। जैसे उन मामलों में जहां माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक नहीं है, उनमें वैध पासपोर्ट शामिल की आवश्यकता है।
एसआईआर का पंजाब में विरोध तय
पंजाब में एसआईआर को लेकर विरोध भी तय है क्योंकि पहले ही कांग्रेस देश में इसका विरोध कर रही है। प्रदेश कांग्रेस के नेता भी इसके खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं। सीएम भगवंत मान भी इसका विरोध कर चुके हैं। मान ने कहा था कि एसआईआर को लेकर बहुत सी पार्टियों को एतराज है। इस तरह आम आदमी पार्टी पंजाब भी विरोध में उतर सकती है।
यह मकसद है एसआईआर कराने का
एसआईआर का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में फर्जी, अयोग्य और दो जगहों पर पंजीकृत मतदाताओं को हटाना है। साथ ही जन्मस्थान की जांच के जरिये अवैध विदेशी प्रवासियों की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची से हटाना है। यह प्रक्रिया बांग्लादेश सहित अवैध प्रवासियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में चल रही कार्रवाई के बीच खास महत्व रखती है। पंजाब सरकार ने वर्ष 2021 के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर जानकारी दी थी कि प्रदेश में 261 रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे हैं। 191 राज्य के मोहाली जिले के डेरा बस्सी क्षेत्र और 70 रोहिंग्या इसी जिले के हंदेसरा गांव में रहते हैं। इनमें से ज्यादातर के पास संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) प्रमाण पत्र हैं।
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