पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक लंबे समय से चल रहे सेवा मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 23 साल से न्याय का इंतजार कर रहे एक उम्मीदवार को सरकारी नौकरी देने का आदेश दिया है। साथ ही साफ कहा है कि अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो राज्य सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जानिए क्या है पूरा मामला यह मामला अनुकंपा नियुक्ति (दया के आधार पर नौकरी) से जुड़ा है। उम्मीदवार की मां वर्ष 2003 में गोहाना के पशु चिकित्सालय में कार्यरत थीं और उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद बेटे ने अनुकंपा आधार पर नौकरी की मांग की। लेकिन उसका मामला इसलिए अटक गया क्योंकि उसके दत्तक (गोद लिए जाने) को लेकर विवाद था। सरकार ने उसके दावे को मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने पहले भी दिया था हक वर्ष 2006 में सिविल अदालत ने उम्मीदवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि उसे नौकरी का अधिकार है। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की, लेकिन वह भी खारिज हो गई। इसके बावजूद मामला हाई कोर्ट में लंबित रहा और अपील का अंतिम फैसला आने में करीब 19 साल लग गए। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ ने कहा कि इतने वर्षों तक मामला लंबित रहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे व्यक्ति को मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है। कोर्ट ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के बराबर है। इसलिए राज्य सरकार को बिना किसी और कानूनी प्रक्रिया के तुरंत नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन तुरंत किया जाए। यदि देरी हुई तो राज्य सरकार को 5 लाख रुपये की कास्ट (जुर्माना) देना पड़ेगा। इस फैसले के साथ ही 23 साल से नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे उम्मीदवार को आखिरकार राहत मिल गई है।
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