फतेहगढ़ साहिब में लोगों की टोपियां निकालकर बरछे पर टांक कर ले जाता निहंग सिंह।
पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में 25 से 27 दिसंबर तक चले शहीदी समागम में आए श्रद्धालुओं के सिर से निहंग लड़कों ने जबरन टोपियां उतार दीं। फिर उन्हें बरछे पर टांगकर कंधे पर लटका लिया। समागम में पहुंचे कुछ सिखों ने ही इसका विरोध कर दिया। इसके बाद उनके बीच इसको ल
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) मेंबर ने भी इसको सिख मर्यादा के उलट करार दिया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारे के भीतर टोपी पहनकर नहीं जा सकते। जबरन टोपियां उतारने की जगह संगत को प्रेरित करना चाहिए था।
निहंग बाणे में दिख रहा दूसरा लड़का, जिसने भी बरछे पर टोपी टांग रखी थी।
सबसे पहले जानिए, वीडियो में क्या दिख रहा
वीडियो में निहंग के बाणे में 2 लड़के हैं। इनमें एक लड़के ने अपने कंधे पर बरछा रखा है। बरछे में लोगों के सिर से जबरन निकाली गई टोपियां टांगी गई हैं। जिससे बरछा पूरा भर गया है। दूसरे लड़के के हाथ में भी बरछा है, उसने भी टोपी टांग रखी है। जब वहीं सिख समुदाय के दूसरे लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो निहंग लड़के उनसे बहस करते हुए दिखाई दिए।
निहंग और सिख व्यक्ति के बीच क्या बहस हुई..
सिख व्यक्ति: ओ बेटा कहां से पढ़कर आया है मुझे बताना जरा, क्या पढ़कर आया? ये टोपियां क्यों उतारी तुमने लोगों की। निहंग लड़का: ये शहीदों की धरती है। टोपियां पहनकर थोड़े आएंगे।
सिख व्यक्ति: शहीदों की धरती है तो फिर लोगों को यहां आने के लिए मना कर दो। निहंग लड़का: टोपियां लेकर क्यों आए फिर।
सिख व्यक्ति: गलत बात है ये बिल्कुल गलत। ये हमारे लिए बहुत गलत बात है। निहंग लड़का: बाबा जी, आप खुद सरदार हो। आप सोचो। सिर पर रूमाल बांधो।
सिख व्यक्ति: जबरदस्ती नहीं करनी होती है किसी के साथ। निहंग लड़का: जबरदस्ती नहीं है जी
सिख व्यक्ति: जबरदस्ती नहीं है तो और क्या है? निहंग लड़का: आप खुद सरदार हो देख लो।
सिख व्यक्ति:: सरदार हैं चाहे जो हैं, पर लोगों के साथ जबरदस्ती क्यों कर रहे हो।
(इसके बाद दोनों निहंग लड़के वहां से चले जाते हैं और मामला शांत हो जाता है।)

सिख व्यक्ति के विरोध के बाद दोनों निहंग लड़के वहां से चले गए।
लड़की ने लोगों को टोपी न पहने के लिए किया प्रेरित निंहग के बाणे में सजी तरनतारन की रोजप्रीत कौर शहीदी समागम के दौरान फतेहगढ़ साहिब आई संगत को सिख मर्यादाओं के बारे में प्रेरित करती रही। रोजप्रीत कौर लोगों को प्रेरित कर रही थी कि वो टोपी पहनकर गुरुद्वारा साहिब में न जाएं तो लोग उसके कहने पर अपनी टोपियां भी उतार रहे थे। रोजप्रीत कौर ने लोगों को कहा कि वो गुरुद्वारा साहिब में पटका या रुमाल बांधकर ही जाएं। रोजप्रीत की विनम्रता देखकर लोग अपने आप टोपियां उतारते हुए दिखे। लोग उसकी प्रशंसा भी कर रहे हैं।

लोगों को टोपी की जगह रूमाल या पटका बांधकर जाने के लिए प्रेरित करतीं रोजप्रीत कौर।
इस पूरे मामले पर SGPC मेंबर की 3 अहम बातें…
- 1. सिख धर्म में जबरदस्ती की मर्यादा नहीं: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व महासचिव व वर्तमान सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल का कहना है कि सिख धर्म में इस तरह जबरदस्ती करने की मर्यादा नहीं है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब में टोपी पहनकर नतमस्तक होने की परंपरा नहीं है। इसलिए गुरुद्वारा साहिब के गेट पर ही लोगों को सिर ढकने के लिए पटके दे दिए जाते हैं।
- 2. जबरदस्ती टोपियां उतारना गलत: SGPC मेंबर ग्रेवाल ने कहा- गुरुद्वारा साहिब में जाते हुए कोई इस बात का विरोध भी नहीं करता है। जो लोग नतमस्तक होने आते हैं वो मर्यादाओं का पालन भी करते हैं और उसमें संगत कोई आपत्ति नहीं होती है। बाहर अगर कोई टोपी पहनकर घूम रहा था तो उसे पगड़ी या पटका पहनने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए था। जबरदस्ती उनकी टोपियां उतारना भी गलत है।
- 3. SGPC ने दस्तार का लंगर लगाया: गुरचरण ग्रेवाल ने कहा कि एसजीपीसी की तरफ से लोगों को सिख मर्यादाओं से जोड़ने के लिए बाकायदा स्टॉल लगाए गए थे। SGPC ने दस्तार लंगर लगाया था और लोगों को सिर पर दस्तार सजाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग आए और उन्होंने दस्तार बांधनी सीखी और दस्तार लेकर गए।

गुरचरण सिंह ग्रेवाल, पूर्व महासचिव, एसजीपीसी।