कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद एक नवजोत कौर सिद्धू प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग पर तीखा हमला बोला है। बयान में कहा गया है कि उन्होंने उस कांग्रेस को अलविदा कह दिया है, जहां मेहनती और काबिल नेताओं की बात नहीं सुनी जाती और जहां फैसले निजी स्वार्थों के आधार पर लिए जाते हैं। नेता ने आरोप लगाया कि राजा वड़िंग अब तक के सबसे भयानक, अक्षम और भ्रष्ट प्रदेश अध्यक्ष साबित हुए हैं। उनके मुताबिक, वड़िंग ने कांग्रेस को कमजोर करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के साथ हाथ मिलाया और अपने हितों के चलते खुद को कानूनी कार्रवाई से बचाया। आरोप है कि निजी फायदे के लिए आम आदमी पार्टी के साथ कथित साठगांठ कर पार्टी की विचारधारा से समझौता किया गया। बयान में कहा गया कि राजा वड़िंग ने असहमति जताने वाले नेताओं के खिलाफ सस्पेंशन की तैयारी कर रखी थी। खुद उनके लिए सस्पेंशन लेटर तैयार रखा गया, लेकिन सवाल उठाया गया कि उन करीब 12 वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जो कथित तौर पर नवजोत सिंह सिद्धू को नुकसान पहुंचाने के लिए मजीठिया के साथ मिलकर काम कर रहे थे। आरोप है कि नवजोत को हराने में भूमिका निभाने वालों को बड़े पदों से नवाज़ा गया। नेता ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें हराने के इरादे से उनकी सीट पर जानबूझकर उम्मीदवार बैठाए गए। वहीं, आशु, चरणजीत सिंह चन्नी, भट्टल, डॉ. गांधी और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा खुलेआम चुनौती देने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। बयान में कहा गया कि उनके पास राजा वड़िंग को बेनकाब करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं, लेकिन अब उन्हें इसमें कोई रुचि नहीं है। अंत में उन्होंने कहा कि राजा वड़िंग पार्टी को जिताने के बजाय उसे खत्म करने में ज्यादा व्यस्त हैं और अपनी ही मातृ संस्था के प्रति ईमानदार न होने पर उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए।
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