Animal husbandry Tips : गिलोय गायों के लिए एक लाभकारी आयुर्वेदिक औषधि है. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, बुखार कम करने और पाचन को मजबूत करने में सहायक है. गिलोय के नियमित और सीमित उपयोग से गाय स्वस्थ रहती हैं और दूध उत्पादन में भी सुधार होता है. गिलोय प्राकृतिक रूप से शरीर को ताकत देती है. वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से लड़ने में मदद करती है. यह एक बेलनुमा औषधीय लता है, जो नीम, जामुन जैसे पेड़ों पर चढ़ी हुई दिखाई देती है.
गिलोय को आयुर्वेद में “अमृता” कहा गया है, जिसका अर्थ है- अमरता देने वाली. यह एक बेलनुमा औषधीय लता है, जो प्रायः नीम, जामुन जैसे पेड़ों पर चढ़ी हुई दिखाई देती है. गिलोय का वैज्ञानिक नाम Tinospora cordifolia है और पहाड़ों में इसे गुरज्या बेला कहा जाता है. आयुर्वेद में इसका उपयोग सदियों से मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशुओं के उपचार में भी किया जाता रहा है. आज जब पशुपालन में रसायनों और दवाइयों के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं, तब गिलोय जैसी प्राकृतिक औषधियां गायों के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रही हैं.

गिलोय का सबसे बड़ा लाभ है इम्यूनिटी बढ़ाना. बदलते मौसम, गंदे पानी या कमजोर चारे के कारण गायों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है. गिलोय का नियमित और सीमित उपयोग शरीर की अंदरूनी ताकत को बढ़ाता है, जिससे गायें जल्दी बीमार नहीं पड़तीं. यह वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से लड़ने में शरीर की मदद करती है.

गायों में बुखार होना एक आम समस्या है, खासकर बरसात और सर्दियों के मौसम में. गिलोय में प्राकृतिक ज्वरनाशक गुण पाए जाते हैं. इसका काढ़ा देने से बुखार धीरे-धीरे कम होता है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते हैं. संक्रमण की स्थिति में यह शरीर को अंदर से साफ करने का काम करती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

अक्सर देखा जाता है कि गायों को अपच, गैस, भूख न लगना या दस्त जैसी समस्याएं हो जाती हैं. गिलोय पाचन अग्नि को संतुलित करती है. यह आंतों को मजबूत बनाकर भोजन के सही पाचन में मदद करती है. जिन गायों का पाचन सही रहता है, उनमें दूध उत्पादन भी बेहतर होता है.

गिलोय का अप्रत्यक्ष लेकिन महत्त्वपूर्ण लाभ दूध उत्पादन से जुड़ा है. जब गाय स्वस्थ रहती है, उसका पाचन ठीक होता है और शरीर में सूजन या संक्रमण नहीं होता, तो दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिलता है. कुछ पशुपालकों का अनुभव है कि गिलोय के सीमित उपयोग से दूध में प्राकृतिक चमक और पोषक तत्व बढ़ते हैं.

बुजुर्ग गायों या अधिक दूध देने वाली गायों में जोड़ों का दर्द और सूजन आम समस्या है. गिलोय में सूजनरोधी (Anti-inflammatory) गुण होते हैं, जो शरीर के अंदर की सूजन को कम करने में सहायक हैं. इससे गायों की चाल में सुधार आता है और वे ज्यादा सक्रिय रहती हैं.

गायों में खुजली, फोड़े-फुंसी या त्वचा संक्रमण की समस्या भी देखी जाती है. गिलोय रक्त को शुद्ध करने का काम करती है, जिससे त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं धीरे-धीरे कम हो जाती हैं. कभी-कभी गिलोय के काढ़े से शरीर धोने पर भी अच्छे परिणाम देखे गए हैं.

गायों को गिलोय देने के लिए सबसे अच्छा तरीका है काढ़ा. ताजी गिलोय की डंडी को छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तो उसे ठंडा करके छान लें. यह काढ़ा पशु चिकित्सक की सलाह से सीमित मात्रा में दें. ध्यान रखें कि अधिक मात्रा में किसी भी औषधि का उपयोग नुकसानदेह हो सकता है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.