जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में 23 दिसंबर को कुलगुरु पवनकुमार शर्मा के साथ हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार चारों पेंशनर्स को कोर्ट से बुधवार को राहत मिल गई। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई प्रकरण) जोधपुर महानगर से जेएनवीयू से रिट
उल्लेखनीय है कि जेएनवीयू के पूर्व कर्मचारी पारंपरिक पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। आरोप है कि 23 दिसंबर को जब कुलगुरु शर्मा शांति वार्ता के लिए आंदोलनकारियों के पास पहुंचे, तो आंदोलनकारियों की भीड़ ने उनके साथ हाथापाई की और उन्हें नीचे गिराकर चोटें पहुंचाई।
कुलपति को घटना के बाद मथुरादास माथुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनके हाथ और मुंह में लगी चोटों का उपचार किया गया। एसीपी छवि शर्मा और थाना अधिकारी राजीव भादू ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था और कुलपति के बयान के आधार पर FIR दर्ज की गई थी।
चार वरिष्ठ नागरिकों को किया था गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में कुलगुरु की रिपोर्ट पर दर्ज केस में चार पेंशनर्स को गिरफ्तार किया था। उनके वकील नीलकमल बोहरा, रणजीत जोशी, नीलेश बोहरा, गोकुलेश बोहरा, आरिफ मलकानी और सुधीर सारस्वत ने पेंशनर्स का पक्ष रखा। इन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि सभी आरोपी 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक हैं और उनकी स्थिति को देखते हुए जमानत दी जानी चाहिए।
वकील ने यह भी कहा कि अभियुक्तों ने किसी प्रकार की हिंसा में भाग नहीं लिया और वे केवल शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल थे। पारंपरिक पेंशन योजना की मांग को लेकर आंदोलन के दौरान कुलपति स्वयं असंतुलित होकर गिर गए थे। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने किसी भी प्रकार का उपद्रव या हिंसा नहीं की।
कोर्ट ने शर्तों के साथ दी जमानत
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जमानत आवेदन स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि प्रत्येक आरोपी को 20 हजार रुपए का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की एक प्रतिभूति प्रस्तुत करे। कोर्ट ने यह भी शर्त लगाई कि यदि आरोपी किसी अन्य प्रकरण में आवश्यक नहीं हैं, तो उन्हें इस प्रकरण में जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
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