डॉक्टर नरूला को नौकरी से निकालने के आदेश में सुक्खू सरकार ने लिखा कि इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी एंड एच), शिमला की अनुशासनात्मक जांच समिति से प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मिली थी. जांच में पाया गया है कि मरीज अरुण (36) और पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राघव निरुला के बीच हाथापाई हुई.
अनुशासनात्मक समिति ने जांच के बाद डॉक्टर को छुट्टी पर भेजने की सिफारिश की थी. इसके अलावा, आरोपी डॉक्टर राघव के खिलाफ मरीज के परिजनों ने एफआईआर दर्ज कराई है.
सुक्खू सरकार ने अपने टर्मिनेशन ऑर्डर में लिखा कि जांच रिपोर्ट तथा हाथापाई की वीडियो क्लिप के आधार पर डॉ. राघव निरुला को पहले सस्पेंड कर दिया गया था. साथ ही सरकार बाद में 72 घंटों के भीतर रिपोर्ट पेश करने के लिए जांच समिति बनाई गई थी.ऐसे में 24 दिसंबर को आईजीएमसी के प्रिंसिपल ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी औऱ उसी में पाया गया कि दोनों पक्ष, मरीज तथा सीनियर रेजिडेंट डॉ. राघव निरुला घटना के लिए जिम्मेदार हैं. ऐसे में रेजिडेंट डॉक्टर नीति, 2025 का उल्लंघन किया है और धारा-9 के प्रावधानों के तहत डॉ. राघव निरुला की सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं.
शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में मारपीट क्यों हुई थी
गौरतलब है कि 22 दिसंबर 2025 को करीब साढ़े 12 बजे यह घटना पेश आई थी. इस दौरान पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में शिमला के कुपवी के जुब्बल के रहने वाले अर्जुन सिंह पंवार अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचे थे. उन्होंने एंडोस्कॉपी विभाग में टेस्ट हुआ था और फिर उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी, क्योंकि दो घंटे बाद एक और टेस्ट होना था. इस दौरान आरोपी डॉक्टर ने उनके साथ बदतमीजी से बात की थी. डॉक्टर पर आरोप है कि उन्होंने मरीज से तू तड़ाक करते हुए बात की. यहां तक कहा कि तू मुझसे कितना बड़ा है. इसकी एक वीडियो भी सामने आई थी, जिसमें मरीज, डॉक्टर और तीमारदार में बहसबाजी हो रही है. वहीं, इसी पर दोनों में मारपीट हुई. डॉक्टर ने बेड पर ऑक्सीजन सपोर्ट पर लेटे मरीज पर जोरदार हमला किया था. इस मामले में शिमला पुलिस ने भी केस दर्ज किया है. पूरा मामला काफी सुर्खियां बटोर रहा है.
सीएम ने की थी मीटिंग
इस मामले में मरीज के परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री, एसपी शिमला के अलावा, सीएम सुक्खू से भी मुलाकात की थी और डॉक्टर को नौकरी से निकालने और उनके खिलाफ अटैम्प्ट टू मर्डर की धाराएं लगाने की मांग की थी. सीएम ने भी मामले में 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी थी. वहीं, डॉक्टरों की एसोशिएसन भी उनके समर्थन में उतरी थी और डॉक्टर राघव का बचाव किया था.
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