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Long Drive in Patna: अगर आप लॉन्ग ड्राइव पर निकलने की प्लॉनिंग कर रहे हैं तो पटना एम्स से औरंगाबाद तक जाने वाली नहर वाली रोड आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है. दोनों तरफ पेड़, खेत, नहर और बालू के कृत्रिम पहाड़ देखने को मिलेगा. खाने पीने के लिए चाट से लेकर लिट्टी तक कई लजीज डिश मिल जाएंगी. पूरा ट्रिप एकदम ट्रैफिक फ्री रहेगा.
अगर आप अपनी गाड़ी से पटना से औरंगाबाद होते हुए डेहरी ऑन सोन की तरफ घूमने जाना चाहते हैं, तो एम्स गोलंबर से शुरू होने वाली नहर किनारे की सड़क आपके लिए बेस्ट रास्ता है. यह सड़क शांत, साफ और कम ट्रैफिक वाली है. यहां ट्रक और बस नहीं चलते, इसलिए सफर आराम से होता है. ज्यादातर बाइक और कार ही दिखती हैं. इससे ड्राइव करना आसान लगता है और रास्ता भी खुला-खुला रहता है.

यह सड़क सोन नदी के पास बनी है और डेहरी ऑन सोन से पटना तक करीब 150 किलोमीटर तक जाती है. सड़क सिंगल लेन है, लेकिन इतनी चौड़ी है कि दो गाड़ियां आराम से पास हो सकती हैं. एक तरफ गांव और हरे खेत दिखाई देते हैं, तो दूसरी तरफ सिंचाई वाली नहर बहती रहती है. इस वजह से रास्ता बहुत सुंदर लगता है और सफर में मज़ा आता है.

यह नहर डेहरी ऑन सोन के इंद्रपुरी बराज से निकलती है और पटना तक आती है. इसका पानी आसपास के खेतों तक पहुंचाया जाता है ताकि किसान धान, गेहूं, दाल और सरसों जैसी फसलें उगा सकें. किसानों के काम को आसान बनाने के लिए ही नहर के किनारे यह सड़क बनाई गई है, जिससे गांवों के बीच आना-जाना भी आसान हो गया है.
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सड़क लगभग सीधी है और ज्यादा मोड़ नहीं हैं, इसलिए गाड़ी चलाना आसान लगता है. एक बार स्पीड पकड़ने पर घंटों उसी रफ्तार को मेंटेन करते हुए गाड़ी चला सकते हैं. रास्ते के दोनों तरफ सागवान और शीशम जैसे पेड़ लगे हैं. बसंत के मौसम में पेड़ों से पत्ते गिरकर सड़क पर बिछ जाते हैं, जो बहुत सुंदर लगता है. सुबह सूरज उगने और शाम ढलने का नजारा यहां खास तौर पर देखने लायक होता है. एक तरफ नहर और दूसरी तरफ खेतों का दृश्य मन को खुश कर देता है. रास्ते में गन्ने के खेत और गुड़ बनाते लोग भी दिखाई देते हैं.

यह रास्ता डेहरी ऑन सोन से शुरू होकर औरंगाबाद, अरवल, कनपा, बिक्रम, नौबतपुर होते हुए पटना तक आता है. अरवल और कनपा के बीच सड़क सोन नदी के बहुत करीब आ जाती है. यहां खेतों में बालू के बड़े-बड़े पहाड़ दिखते हैं. दरअसल, यह नदी से निकाली गई बालू को जमा करके बनाए जाते हैं. उन पर मशीनें काम करती दिखती हैं. देखने में किसी कृत्रिम बालू के पहाड़ जैसे दिखते हैं.

इस सफर में खाने-पीने की भी कमी नहीं है. नौबतपुर, बिक्रम, बैदराबाद, अरवल और मेहंदिया जैसे कई जगहों पर स्वादिष्ट खाने की दुकानें मिलती हैं. नौबतपुर के चिरौरा में लिट्टी, समोसा, चाय और चाट की कई दुकानें हैं. बिक्रम में चंपारण मटन मिलता है, जो काफी मशहूर है. बैदराबाद की चाट और मेहंदिया का लाल छेना भी लोग बड़े चाव से खाते हैं. ट्रैफिक तो ना के बराबर है. इस तरह शांत रास्ता, सुंदर नजारा और स्वादिष्ट खाना, सब मिलकर इस यात्रा को यादगार बना देते हैं.
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