तेजस्वी का पुराना बयान फिर क्यों चर्चा में
इस मामले के सामने आने के बाद 2017 में तेजस्वी यादव का दिया गया बयान फिर सुर्खियों में है. उस वक्त सीबीआई की छापेमारी और जांच पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी ने कहा था कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि क्या पिछड़े परिवार से होने की वजह से उन्हें साजिश का शिकार बनाया जा रहा है. तेजस्वी का कहना था कि जब कथित घटनाएं हुईं, उस समय वे नाबालिग थे, ऐसे में भ्रष्टाचार के आरोप निराधार हैं. अब जब कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब केस में आरोप तय कर दिए हैं, तो विपक्ष इस पुराने बयान को लेकर तेजस्वी पर तंज कस रहा है, वहीं आरजेडी इसे राजनीतिक साजिश करार दे रही है.
नीतीश कुमार का ‘बच्चा’ कहना और सदन की नोकझोंक
लैंड फॉर जॉब केस की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच 2025 में विधानसभा के भीतर हुई तीखी नोकझोंक भी फिर से सुर्खियों में आ गई है. विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव को “बच्चा” बताते हुए कहा था- “तुम लोगों को कुछ नहीं आता, अभी बच्चा हो.” नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि उन्होंने ही लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री बनाया था और 2005 में जब वे सत्ता में आए, तब बिहार की क्या स्थिति थी, यह सबको पता है. इस बयान के बाद आरजेडी विधायकों ने जमकर हंगामा किया और सदन से वॉकआउट कर दिया.
मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में हुई शिक्षकों की नियुक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि सारा काम उनकी सरकार ने किया. इस पर तेजस्वी यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि उस समय सरकार आरजेडी की थी. जवाब में नीतीश कुमार ने कहा कि “एक बार गड़बड़ी की तो हटाया गया, दूसरी बार भी गड़बड़ी हुई तो हटाना पड़ा.” इस बयानबाजी ने बिहार की राजनीति में सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच की तल्खी को और उजागर कर दिया.
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला
सीबीआई के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। यह जमीन बाद में लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम पर ट्रांसफर कराई गई. जांच एजेंसी का दावा है कि यह पूरा खेल एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया। हालांकि, लालू परिवार और अन्य आरोपियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है. सीबीआई ने अदालत को बताया कि चार्जशीट में नामजद कुल 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी के खिलाफ सबूतों के आधार पर आरोप तय किए गए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब ट्रायल की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है.
सियासत तेज, निगाहें ट्रायल पर
लैंड फॉर जॉब केस में आरोप तय होने के बाद साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की राजनीति में भी इसका असर दिखेगा. एक तरफ बीजेपी और एनडीए इस मुद्दे को लेकर आरजेडी पर हमलावर हैं, वहीं आरजेडी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है. अब सबकी निगाहें अदालत में होने वाले ट्रायल पर टिकी हैं. सवाल यह है कि क्या सीबीआई अपने आरोपों को ठोस सबूतों के जरिए साबित कर पाएगी या आरजेडी नेताओं का यह दावा सही साबित होगा कि यह मामला पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है. फिलहाल, आरोप तय होते ही तेजस्वी यादव के पुराने बयान और नीतीश कुमार के तंज ने बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ दी है.
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