Pasta Rose Cultivaiton: किसानों के लिए पास्ता गुलाब की खेती नया विकल्प है. जो कम जमीन में, कम समय में और रोज़ाना आमदनी चाहते हैं, वे इसकी खेती कर सकते हैं. खंडवा में नया ट्रेंड अब धीरे-धीरे दूसरे किसानों को भी आकर्षित कर रहा है. किसान से जानें उनका अनुभव…
खंडवा में पहली बार पास्ता गुलाब की खेती
Local 18 से बातचीत में सुरुगांव जोशी के किसान राजू पटेल बताते हैं, वे डेढ़ साल से पास्ता गुलाब की खेती कर रहे हैं. दावा किया कि वह खंडवा में इस किस्म का गुलाब लगाने वाले पहले किसान हैं. आगे कहा, पहले वह परंपरागत खेती करते थे, लेकिन बढ़ती महंगाई और खर्चों के चलते उसमें नुकसान होने लगा. ऐसे में उन्होंने ऐसी खेती तलाशनी शुरू की, जो रोज कमाई दे सके. इसी सोच के साथ उन्होंने पास्ता गुलाब को चुना.
500 पौधों से रोज हजारों की आमदनी
किसान राजू पटेल बताते हैं कि उन्होंने डेढ़ साल पहले 500 पौधे लगाए थे. उस समय एक पौधे की कीमत करीब 35 रुपये थी, लेकिन आज वही पौधा 200 से 250 रुपये तक बिक रहा है. एक पौधा एक बार में 50 से 100 फूल देता है. खंडवा के लोकल बाजार में एक फूल 30 पैसे प्रति नग तक बिक जाता है. 500 पौधों से रोजाना औसतन 4 हजार फूल निकल आते हैं. इस हिसाब से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है. राजू पटेल कहते हैं कि पौधा लगाने के करीब 6 महीने बाद फूल आना शुरू हो गया था. इसके बाद लगातार डेढ़ साल से फूल मिल रहे हैं.
जानिए पास्ता गुलाब की खेती
सीजन और त्योहारों के समय यह कमाई और भी बढ़ जाती है. कई बार एक दिन में 1800 से 2000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है. किसान का दावा है कि उन्होंने इन 500 पौधों से अब तक 3 से 4 लाख रुपये की कमाई कर ली है.
यूट्यूब से सीखी खेती, अब बन गए मिसाल
राजू पटेल बताते हैं कि उन्होंने यह खेती यूट्यूब देखकर सीखी. जब सोयाबीन और प्याज की खेती में लगातार नुकसान हो रहा था और फसलों के सही दाम नहीं मिल रहे थे, तब उन्होंने फूलों की खेती को विकल्प के तौर पर अपनाया. शुरुआत में गांव के लोग हंसते थे, लेकिन आज वही लोग उनसे खेती की जानकारी लेने आते हैं. अब उनके गांव में 7 से 8 अन्य किसान भी पास्ता गुलाब की खेती कर रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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