पंचकूला के हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के डीआरओ जोगिंद्र शर्मा को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई है। जिसके बाद अब ACB उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास करेगी। पंचकूला कोर्ट में 20 फरवरी को जोगिंद्र शर्मा को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की कोर्ट में लंबी बहस चली। बहस के दौरान बचाव पक्ष की ओर से चिदंबरम और जगनमोहन रेड्डी के केस तक का हवाला दिया गया। लेकिन एसीबी की ओर से रखी गई ठोस दलीलों और साक्ष्यों के चलते कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया। 3 पाइंट में कोर्ट ऑर्डर और खारिज होने की वजह… पहले अंतरिम जमानत हुई थी मंजूर गिरफ्तारी से बचने के लिए 6 फरवरी को जोगिंद्र शर्मा ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। इस पर 11 फरवरी को कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जिसके बाद बहस के लिए 12 फरवरी की तारीख तय की गई थी। सोमवार को दोनों पक्षों के बीच कोर्ट में लंबी बहस चली। बचाव पक्ष ने कोर्ट में कहा कि एसीबी के पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि इस केस में जोगिंद्र शर्मा की कोई भूमिका है। जिसके बाद जांच में शामिल होने के लिए आदेश जारी करते हुए अंतरिम जमान मंजूर की थी। तहसीलदार विक्रम सिंगला के खिलाफ विभागीय जांच शुरू रायपुर रानी के तहसीलदार विक्रम सिंगला, जिन्हें एसीबी ने गिरफ्तार किया था, के खिलाफ अब विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। वित्तायुक्त के आदेश पर अंबाला कमिश्नर ने पंचकूला डीसी से विक्रम सिंगला से जुड़ा रिकॉर्ड मांगा था, जिसे डीसी कार्यालय ने भेज दिया है। अंबाला कमिश्नर ने डीसी से तहसीलदार विक्रम सिंगला द्वारा की गई रजिस्ट्री, केस से जुड़े गवाहों की सूची और अन्य दस्तावेज मांगे हैं। विभाग मुख्यालय ने जांच की जिम्मेदारी अंबाला कमिश्नर को सौंपी है। कमिश्नर ने एक सप्ताह के भीतर पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के लिए पत्र लिखा है। इसके बाद जांच रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
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