Palamu Women Making Mushroom Seeds: मशरूम की फसल में बीज का अहम रोल होता है, सही बीज से अच्छी फसल की बुनियाद पड़ती है. इसी क्रम में पलामू की सुषमा कुमारी साल 2006 से सही दरों पर बढ़िया बीज यानी स्पॉन उपलब्ध करा रही हैं.
खेती के साथ प्रशिक्षण भी
सुषमा कुमारी खुद मशरूम की खेती करती हैं और साथ ही दूसरे किसानों व ग्रामीणों को इसकी ट्रेनिंग भी देती हैं. वे लोगों को यह सिखाती हैं कि कम जगह और सीमित संसाधनों में कैसे मशरूम की खेती कर अच्छी आमदनी की जा सकती है. खासकर महिलाएं और छोटे किसान इस प्रशिक्षण से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं.
ऐसे तैयार होता है मशरूम का बीज
मशरूम का बीज तैयार करने की प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से की जाती है. इसके लिए सबसे पहले ताजा गेहूं लिया जाता है. गेहूं को अच्छी तरह साफ कर धोया जाता है. इसके बाद गेहूं को आधा उबाला जाता है. उबालने के बाद इसे पंखे के नीचे फैलाकर सुखाया जाता है, ताकि उसमें मौजूद नमी कम हो जाए.
इसके बाद गेहूं में कैल्शियम कार्बोनेट पाउडर मिलाया जाता है, जिससे बीज आपस में चिपके नहीं. फिर इस मिश्रण को स्टरलाइज किया जाता है. स्टरलाइजेशन के बाद इसमें मदर कल्चर डाला जाता है. पूरी प्रक्रिया के बाद मशरूम का बीज तैयार होने में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है.
किफायती दर पर उपलब्ध
सुषमा देवी ने बताया कि मशरूम के बीज की कीमत 120 रुपये प्रति किलो रखी गई है, ताकि किसान आसानी से इसे खरीद सकें. उन्होंने बताया कि किसान सीधे उनसे संपर्क कर बीज प्राप्त कर सकते हैं. कम कीमत और स्थानीय स्तर पर उपलब्धता के कारण किसानों को बाहर से बीज मंगाने की जरूरत नहीं पड़ती.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा
सुषमा कुमारी की यह पहल न सिर्फ स्वरोजगार का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है. उनके प्रयास से पलामू जिले में मशरूम की खेती को बढ़ावा मिल रहा है और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं.
About the Author
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.