Palamu news: फरवरी यानी प्यार का महीना आने ही वाला है. इस मौके पर प्रेमी जोड़े एक-दूसरे को गुलाब भेंट करते हैं.गुलाब में फूल लाने के लिए किसी महंगे खाद या केमिकल की जरूरत नहीं है. आलू और नींबू से तैयार किया गया ‘फ्री का घोल’ पौधों की ग्रोथ और फूलों की संख्या बढ़ाने में बेहद असरदार माना जाता है.
फरवरी यानी प्यार का महीना आने ही वाला है. इस मौके पर प्रेमी जोड़े एक-दूसरे को गुलाब भेंट करते हैं. अगर आपके घर में गुलाब का पौधा लगा है और आप चाहते हैं कि वैलेंटाइन-डे से पहले उसमें ढेर सारे फूल खिलें, तो यह घरेलू नुस्खा आपके बहुत काम आने वाला है.

कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि गुलाब में फूल लाने के लिए किसी महंगे खाद या केमिकल की जरूरत नहीं है. आपकी किचन में मौजूद आलू और नींबू से तैयार किया गया ‘फ्री का घोल’ पौधों की ग्रोथ और फूलों की संख्या बढ़ाने में बेहद असरदार माना जाता है.

उन्होंने बताया कि आलू और नींबू से तैयार यह जादुई लिक्विड न केवल पौधे की मिट्टी को उपजाऊ बनाता है, बल्कि गुलाब के पौधे में तेजी से कलियां लाने में भी मदद करता है. नियमित इस्तेमाल से पौधा हरा-भरा और स्वस्थ बना रहता है.
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आलू में पोटेशियम और फास्फोरस भरपूर मात्रा में होता है, जो फूलों के विकास के लिए बेहद जरूरी तत्व है. वहीं गुलाब की मिट्टी को हल्का अम्लीय वातावरण पसंद होता है, जिसमें नींबू अहम भूमिका निभाता है.

आगे कहा कि इस घोल को बनाने के लिए कच्चे आलू को छिलके समेत कद्दूकस कर पानी में डाल दें और तीन दिनों तक छोड़ दें। दूसरी ओर, नींबू के छिलकों को भी पानी में भिगोकर तीन दिन रखें. तैयार आलू वाले 1 लीटर घोल में केवल 30 मिली नींबू का लिक्विड मिलाएं.

यह घोल खराब नहीं होता, इसलिए आप इसे 15 दिनों तक स्टोर कर सकते हैं. यह मिश्रण न केवल फूलों की संख्या बढ़ाता है, बल्कि उनके रंग की चमक और आकार को भी बेहतर बनाता है.

उन्होंने बताया कि इस घोल को सुबह के समय या सूर्य ढलने के बाद ही पौधों में डालें. दोपहर की तेज धूप में फर्टिलाइजर देने से बचें. हर 15 दिनों में एक बार इस प्रक्रिया को दोहराने से गुलाब के पौधे में नई कलियां आने लगेंगी.

गुलाब की अच्छी पैदावार के लिए दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त माना जाता है. वहीं बादल छाए रहने पर 18 से 20 डिग्री तापमान जरूरी होता है. अधिक आर्द्रता से फफूंद जनित रोग और कम आर्द्रता से लाल मकड़ी का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है.
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