थाना प्रभारी द्वारा जब उसकी पोस्टिंग के बारे में पूछा गया तो उसने देहरादून, हैदराबाद और भुवनेश्वर में काम करने की बात कही. जब तीन अलग-अलग राज्यों में एक साथ पोस्टिंग पर सवाल उठा तो युवक ने खुद को IAS नहीं बल्कि IPTAFS अधिकारी बताया और दावा किया कि यह सेवा भी UPSC से चयनित होती है और IAS के समकक्ष है. युवक के जाने के बाद उसकी बातों और हावभाव पर संदेह होने पर थाना प्रभारी ने पूरे मामले की जानकारी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, हुसैनाबाद को दी. जिसके बाद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा जांच किया गया तो सारी बातें सामने आ गई.
गांव और दस्तावेजों की जांच में खुला राज
पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच, गांव के लोगों से पूछताछ और तकनीकी पड़ताल में यह सामने आया कि राजेश कुमार न तो IAS है और न ही कोई IPTAFS अधिकारी. इसके बाद उसे थाना बुलाकर पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान वह न तो कोई नियुक्ति पत्र, न पहचान पत्र और न ही विभागीय दस्तावेज प्रस्तुत कर सका.
कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने स्वीकार किया कि वह कोई अधिकारी नहीं है. उसने बताया कि उसके पिता का सपना था कि वह IAS बने. उसने चार बार UPSC की परीक्षा दी, लेकिन असफल रहा. इसके बाद उसने पिता, परिजनों और रिश्तेदारों से झूठ बोल दिया कि वह IPTAFS अधिकारी बन गया है और पिछले 6–7 वर्षों से फर्जी अधिकारी बनकर घूम रहा था.
फर्जी आईडी और सरकारी बोर्ड बरामद
तलाशी के दौरान उसके पास से IPTAFS अधिकारी का फर्जी पहचान पत्र, एक मोबाइल फोन, लाइब्रेरी कार्ड, चाणक्य IAS अकादमी का आईडी कार्ड बरामद किया गया. इसके अलावा उसकी हुंडई एरा कार (JH01Z-4884) के आगे ‘GOVT. OF INDIA, CAO, DEPARTMENT OF TELECOMMUNICATION’ लिखा हुआ नीले रंग का फर्जी नेम बोर्ड भी मिला.
पुलिस ने इस मामले में हुसैनाबाद थाना कांड संख्या 01/26, दिनांक 02.01.26 को धारा 204/205/336(2)/336(3)/337/339/340(2) BNS के तहत केस दर्ज कर आरोपी राजेश कुमार (35 वर्ष), पिता स्व. राम किशोर राम, निवासी कुकही, थाना हैदरनगर, जिला पलामू को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
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