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Palamu Joda Bail Yojana: पलामू में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत जोड़ा बैल योजना से 47 किसानों को लाभ दिया जाएगा. इसके तहत एक जोड़ा बैल खरीदने पर 90 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी. यानी 40 हजार के बैल के लिए किसान केवल 400 देंगे.
पलामू. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जोड़ा बैल योजना किसानों के लिए संजीवनी से कम नहीं है. यह योजना मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से किसानों को खेती के लिए दो बैल उपलब्ध कराए जाते हैं. पारंपरिक खेती में बैलों की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है, खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए. इस योजना का उद्देश्य आदिम जनजाति के किसानों को कृषि कार्य में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आय बढ़ाना है. बैलों की सहायता से किसान जुताई, बुवाई और अन्य कृषि कार्य कम लागत में कर सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत घटती है और लाभ बढ़ता है.
क्या है योजना की खासियत
जिला पशुपालन पदाधिकारी प्रभाकर सिन्हा ने बताया कि इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी 90 प्रतिशत सब्सिडी है. कुल 40 हजार रुपए की लागत में सरकार 36 हजार रुपए वहन करती है, जबकि लाभुक किसान को मात्र 4 हजार रुपए का अंशदान करना होता है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को बड़ी राहत मिलती है. बैलों के माध्यम से किसान खेती सुचारु रूप से कर सकते हैं और अपनी लागत व लाभ के अनुपात को दोगुना करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.
पशुओं के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान
सरकार केवल बैल उपलब्ध कराकर ही नहीं रुकती, बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखती है. योजना के तहत दिए जाने वाले जानवरों का नियमित टीकाकरण कराया जाता है, ताकि वे विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रहें. साथ ही उनका बीमा भी कराया जाता है, जिससे किसी अनहोनी की स्थिति में किसान को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े. यह पहल किसानों को सुरक्षा और भरोसा दोनों प्रदान करती है.
पलामू के इतने किसानों को मिल सकता है लाभ
वित्तीय वर्ष 2025-26 में पलामू जिला को इस योजना के तहत 47 लाभुकों का लक्ष्य मिला है. जिला प्रशासन द्वारा पात्र किसानों की पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि योग्य किसान निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर योजना का लाभ उठा सकते हैं.
जोड़ा बैल योजना आदिम जनजाति के किसानों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रही है. कम अंशदान, सरकारी सहयोग, पशु बीमा और टीकाकरण जैसी सुविधाओं के साथ यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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