पत्थर क्वारी ओनर एसोसिएशन से जुड़े पाकुड़ और साहिबगंज जिलों के पत्थर व्यवसायियों ने शुक्रवार को रेलवे में पत्थर की लोडिंग पूरी तरह बंद कर दिया। यह कदम रेलवे द्वारा क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त सुविधाएं न दिए जाने के विरोध में उठाया गया है। पंकज मिश्रा ने हाल ही में पाकुड़ और साहिबगंज के पत्थर व्यवसायियों के साथ एक बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया था कि यदि रेलवे द्वारा सुविधाएं प्रदान नहीं की जाती है, तो 16 जनवरी से पत्थर की लोडिंग पूरी तरह बाधित कर दी जाएगी। इसी घोषणा के तहत शुक्रवार को व्यवसायियों ने लोडिंग रोक दी। पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन की मांग व्यवसायियों की प्रमुख मांगों में कोविड-19 महामारी के दौरान बंद की गई कई ट्रेनों का परिचालन फिर से शुरू करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, इस मार्ग से गुजरने वाली कई एक्सप्रेस ट्रेनों का पाकुड़ और साहिबगंज रेलवे स्टेशनों पर ठहराव सुनिश्चित करने की मांग की गई है। पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सुविधा तथा यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की भी मांग की जा रही है। प्रतिदिन 40 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान पत्थर व्यवसायियों द्वारा रेलवे लोडिंग बंद करने से रेलवे को प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। वहीं, राज्य सरकार को भी प्रतिदिन 40 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। इसके अलावा 2000 मजदूरों पर भी इसका असर पड़ने का अंदेशा जताया जा रहा है.पाकुड़ जिले के अपर साइडिंग, लोअर साइडिंग, बाहरग्राम और तिलभिट्टा रेलवे साइडिंग में कई रेलवे रैक खाली खड़े देखे गए। पत्थर व्यवसायी गोपी बत्रा ने बताया कि वे रेलवे को करोड़ों रुपए का राजस्व देते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेनें नहीं हैं और कई लोकल व एक्सप्रेस ट्रेनें भी बंद कर दी गई हैं। गोपी बत्रा ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे रेलवे रैक में पत्थर की लोडिंग नहीं करेंगे। बताया गया कि पाकुड़ से होकर प्रतिदिन पत्थर से लदा 6 रेलवे रेक जाती है।
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