बुधवार को उपखंड मजिस्ट्रेट, पिंडवाड़ा के समक्ष क्षेत्र की जनता की ओर से एडवोकेट तुषार पुरोहित और एडवोकेट हार्दिक रावल ने नोटिसों का विधिक जवाब प्रस्तुत किया। अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों का हवाला देते हुए नोटिसों को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, जिसे केवल प्रशासनिक आशंका के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। बिना ठोस प्रमाण और प्रत्यक्ष खतरे के इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी विपरीत बताया गया।
प्रशासनिक सख्ती के बावजूद ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं। 28 जनवरी को प्रस्तावित आंदोलन का कार्यक्रम यथावत रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण, आजीविका और भविष्य की सुरक्षा के लिए है। गांव-गांव में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सरकार के प्रति असंतोष देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते संवाद और समाधान का रास्ता नहीं अपनाया गया, तो इसके राजनीतिक परिणाम भी सामने आ सकते हैं।
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राजस्थान में प्रस्तावित पंचायती राज चुनावों से पहले इस मुद्दे ने राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि ग्रामीणों के आक्रोश का सीधा असर सत्तारूढ़ दल पर पड़ सकता है। सिरोही जिले के विभिन्न इलाकों में सरकार के खिलाफ माहौल बनता नजर आ रहा है।
राष्ट्रीय पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह रायका ने DNT समुदाय पर प्रशासनिक दमन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा। रायका ने बताया कि पाली में हुए DNT महाआंदोलन के बाद 5 दिसंबर 2025 को हुई वार्ता में मुकदमे वापस लेने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक 78 लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं हुए हैं। इसके उलट हाल ही में 8 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया है।
खनन परियोजना, BNSS नोटिस और DNT समुदाय से जुड़े मामलों ने मिलकर सिरोही और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना दिया है। जानकारों का कहना है कि यदि प्रशासन संवाद, संवेदनशीलता और कानूनसम्मत तरीके से समाधान नहीं खोजता, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल क्षेत्र की जनता न्याय, अधिकार और सम्मानजनक संवाद की मांग कर रही है, जबकि प्रशासनिक सख्ती से असंतोष लगातार गहराता जा रहा है।
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