दुर्ग-पाटन रोड स्थित भिलाई नगर के रिसाली नगर निगम क्षेत्र में रूआबांधा मैदान इन दिनों विवाद का केंद्र बना हुआ है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल वृत्त दुर्ग द्वारा यहां तालपुरी ब्लॉक-3 के तहत आवासीय एवं व्यावसायिक परिसर निर्माण की योजना का रूआबांधा बस्ती
इस संबंध में उनका अनिश्चितकालीन धरना 5 दिनों से जारी है। बस्तीवासियों का आरोप है कि सरकारी योजना की आड़ में उनके सालों पुराने घरों को तोड़ा जा रहा है और उनकी बसाहट उजाड़ने की तैयारी की जा रही है।
बस्तीवासियों ने अपने संसाधनों से मकान बनाने का दावा किया
रूआबांधा बस्ती के निवासी राजेंद्र प्रसाद चंदन और राजेंद्र रजक सहित अन्य प्रभावितों का कहना है कि बस्ती में अधिकांश लोग गरीब तबके से आते हैं। उनका दावा है कि उन्हें वर्ष 1998 में आवासीय पट्टा दिया गया था, जिसके बाद कई परिवारों ने अपने सीमित संसाधनों से मकान बनाए थे।
बस्तीवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले केंद्रीय शहरी आवास राज्य मंत्री तोखन साहू ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “किसी भी गरीब परिवार को वंचित नहीं किया जाएगा”। हालांकि, पीड़ितों के अनुसार, अब यहां 57 घरों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है, जो मंत्री के बयान के विपरीत है।

निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग
पीड़ितों ने बताया कि वर्ष 2015 में यहां 25 से 30 सीटर सुलभ शौचालय का निर्माण किया गया था, जिसे अब निर्माण कार्य के लिए तोड़ा जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि यह मैदान बस्ती के बच्चों के खेलने का एकमात्र स्थान है, और यहीं पर साप्ताहिक बाजार व मंदिर भी स्थित हैं।
सर्व समाज संस्था रूआबांधा एवं समस्त महिला संगठन की ओर से प्रभावित परिवारों की मांग है कि सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे, नोटिस वापस ले और यथास्थिति बनाए रखे।
आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी
बस्तीवासियों ने 57 घरों पर जारी नोटिस को वापस लेने, खेल मैदान, साप्ताहिक बाजार स्थल और मंदिर को यथास्थिति सुरक्षित रखने की मांग उठाई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
गृह निर्माण मंडल का पक्ष – 57 नहीं, सिर्फ 18 घर अतिक्रमण में
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल वृत्त के उपायुक्त आर.के. राठौर ने बस्तीवासियों के आरोपों को भ्रामक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएसपी से गृह निर्माण मंडल ने यह जमीन खरीदी थी जहां पर अब तालपुरी भिलाई में ब्लॉक-सी का निर्माण विधिवत लेआउट प्लान, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की स्वीकृति, भवन अनुज्ञा और रेरा पंजीकरण के बाद नियमानुसार शुरू किया गया है।
उनका कहना है कि इस परियोजना के तहत करीब 150 से 200 परिवारों ने घर खरीदने के लिए पंजीयन कराया है, जिन्हें समय सीमा के भीतर मकान उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इस योजना में कमजोर एवं निम्न आय वर्ग से लेकर मध्यम आय वर्ग तक के हितग्राहियों के लिए आवास शामिल हैं।
अभी किसी का घर नहीं टूटेगा- मंडल का आश्वासन
आर.के. राठौर के मुताबिक, प्रस्तावित आवासीय निर्माण की जमीन पर सिर्फ 18 घर अतिक्रमण की जद में आते हैं। 57 घर तोड़े जाने की बात को उन्होंने गलतफहमी करार दिया। उन्होंने बताया कि सीमांकन के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया है और फिलहाल सामने की खाली जमीन पर ही काम होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि 18 घरों को लेकर मामला माननीय न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए कोर्ट के आदेश के बिना किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। प्रभावित परिवारों को आश्वस्त किया गया है कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
परियोजना का खाका- 3.75 एकड़ में 321 यूनिट
गृह निर्माण मंडल के अनुसार, रूआबांधा मैदान में प्रस्तावित योजना के तहत 3.75 एकड़ भूमि पर कुल 321 यूनिट का निर्माण किया जाना है। इसमें 280 आवासीय और 41 व्यावसायिक परिसर शामिल हैं।
इस परियोजना को 2 से 3 सालों के अंदर पूर्ण कर हितग्राहियों को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल बैरिकेडिंग कर निर्माण कार्य की तैयारी शुरू कर दी गई है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.