उन्होंने यह भी कहा कि देश आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। बड़े सैन्य उपकरणों से लेकर भारी मशीनरी तक का निर्माण आज देश में ही हो रहा है, जो भारत की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।
30 मेधावियों को स्वर्ण पदक, 31 शोधार्थियों को उपाधियां
दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के 30 स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक तथा 31 शोधार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो विद्यार्थियों को जीवन के नए अध्याय में प्रवेश का अवसर देता है।
इस अवसर पर सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि आज के दौर में अपनी जड़ों को मजबूत रखना आवश्यक है। जीवन मूल्यों और परंपराओं के साथ आगे बढ़ते हुए नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं को योगदान देना चाहिए।
आईआईएम इंदौर के प्रोफेसर पी.के. सिंह ने भाषाई दक्षता और तकनीकी कौशल को समय की मांग बताते हुए कहा कि बदलती तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलना आवश्यक है।
विश्वविद्यालय के चेयरमैन रामपाल सोनी ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि संस्थान विद्यार्थियों को कौशल आधारित और व्यवहारिक शिक्षा प्रदान कर रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। कुलगुरु करुणेश सक्सेना ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत शैक्षणिक शोभायात्रा, दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ हुई। एनसीसी कैडेट्स द्वारा राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। कुलसचिव आलोक कुमार ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इससे पूर्व जिला पुलिस लाइन स्थित हेलीपैड पर जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू और पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह सहित जनप्रतिनिधियों ने राज्यपाल का स्वागत किया। दीक्षांत समारोह में पूर्व सांसद सुभाष बहेडिया, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा, विश्वविद्यालय बोर्ड सदस्य, प्राध्यापक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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