मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने हेमंत खंडेलवाल को 6 महीने पूरे होने जा रहे हैं। इस दौरान संगठन से सरकार तक कई बड़े संदेश दिए गए। जिनमें अनुशासन, बयानबाजी पर लगाम, गुटबाजी पर ‘सीजफायर’ और बोर्ड-निगम नियुक्तियां शामिल हैं। दैनिक भास्कर से बातच
पढ़िए.. भास्कर के सवाल, खंडेलवाल के जवाब
भास्कर : आपने पहली बैठक में कहा था कि जो दाएं-बाएं चलेगा, उसे दिक्कत होगी। क्या ऐसे लोग चिह्नित हुए? हेमंत खंडेलवाल: किसी भी संगठन की सबसे बड़ी ताकत अनुशासन होता है। चाहे वह परिवार हो, दल हो या संगठन अनुशासन के बिना कोई भी व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती। हम चाहे नेता हों या कार्यकर्ता सब पार्टी के अनुशासन के अधीन हैं।
हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं कि छोटी-सी गलती पर बड़ी कार्रवाई की जाए। कई बार कार्यकर्ता से अनजाने में त्रुटि हो जाती है। ऐसे मामलों में समझाइश दी जाती है, चेतावनी दी जाती है लेकिन यदि कोई लगातार अनुशासन तोड़ता है और स्थिति नियंत्रण से बाहर जाती है तो फिर पार्टी को कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं।
भास्कर: पिछले कुछ समय में बयानबाजियों ने पार्टी को असहज किया। क्या अब इस पर सख्ती होगी? हेमंत खंडेलवाल : यह मानव स्वभाव है कि कभी-कभी परिस्थितियों या विषय की सही समझ न होने के कारण व्यक्ति गलती कर बैठता है। हमारा प्रयास यही रहता है कि ऐसी स्थितियां न बनें लेकिन अगर कोई बयान पार्टी या संगठन को नुकसान पहुंचाने वाला है तो उसकी गंभीरता के अनुसार संज्ञान लिया जाता है और कार्रवाई की जाती है।

भास्कर: बोर्ड, निगम और मंडलों में नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से इंतजार है। अब स्थिति कहां तक पहुंची? हेमंत खंडेलवाल : इन विषयों पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है। संगठनात्मक नियुक्तियां हमारी प्राथमिकता में थीं, जिन्हें पहले पूरा किया गया। अब बोर्ड, निगम और मंडलों में भी शीघ्र नियुक्तियां की जाएंगी। मेरा स्पष्ट मत है कि हर उस पद पर ऐसा व्यक्ति बैठे, जो योग्य हो, सक्रिय हो और उस दायित्व को ईमानदारी से निभा सके।
भास्कर : कांग्रेस से आए नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं को कैसे संतुलित करेंगे? हेमंत खंडेलवाल : यह सवाल सरल दिखता है, लेकिन बेहद चुनौतीपूर्ण है। एक समय था जब पार्टी में कार्यकर्ताओं की कमी थी। आज हमारे पास बड़ी संख्या में समर्पित कार्यकर्ता हैं।हर कार्यकर्ता को उसकी क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी देना, उसे संतुष्ट रखना संगठन की परीक्षा होती है लेकिन बीजेपी का संस्कार ऐसा है कि जो जिम्मेदारी मिलती है, कार्यकर्ता उसे पूरे मनोयोग से निभाता है।
भास्कर : सागर में भूपेंद्र–गोविंद सिंह के बीच लंबे समय से तनाव रहा। आपने दोनों को एक फ्रेम में लाने की कोशिश की? हेमंत खंडेलवाल : कार्यकर्ताओं के बीच मनमुटाव सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान नहीं करता, बल्कि पार्टी, विचारधारा और उस क्षेत्र के विकास को भी प्रभावित करता है। मेरा प्रयास सिर्फ सागर ही नहीं, बल्कि हर जिले में यही है कि जहां दूरी दिखे, वहां संवाद हो, मतभेद कम हों और एकजुटता बने क्योंकि जब हम चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो संगठन की एकता सबसे बड़ी ताकत होती है।

भास्कर: आप टोल पर खुद पैसे देते हैं, जबकि आपकी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं के टोल पर विवाद होते हैं। उन्हें यह संदेश क्यों नहीं देते? हेमंत खंडेलवाल: विधायक और जनप्रतिनिधि के नाते टोल की छूट होना एक परंपरा है और यह सम्मान की बात भी है। जजों, राष्ट्रपति से लेकर सेना अधिकारियों और तमाम विशिष्ट व्यक्तियों को यह सुविधा रहती है। उसमें मैं कुछ नहीं कहूंगा।
मैं टोल इसलिए देता हूं क्योंकि जब मैं सांसद बना था, तब मेरे सामने एक घटना हुई। यह 2008 की बात है। मेरे साथ एक जनप्रतिनिधि बैठे थे, उनसे टोल कर्मचारी ने दस मिनट तक बहस की। मैंने कहा आप अपना कार्ड दिखाइए।
तब मैंने कहा कि हम जनप्रतिनिधि अपनी ऊर्जा का उपयोग किसी और काम में करें। टोल कर्मचारी से 10 मिनट तक बहस करना मुझे ठीक नहीं लगा। उसी दिन से मैं टोल दे रहा हूं। अब किसी ने यह बात सोशल मीडिया पर डाल दी, तो लोगों को पता लग गया। मुझे तो यह भी अंदाजा नहीं था कि एक गांव का आदमी प्रदेश अध्यक्ष बनेगा। मेरा शुरू से स्वभाव है कि जो ठीक नहीं लगता, वह नहीं करता।

भास्कर : अब तक जो अध्यक्ष रहे, वे पार्टी की गाड़ी का उपयोग करते थे। आप पार्टी के वाहन से क्यों नहीं चलते? हेमंत खंडेलवाल : अभी तक जो अध्यक्ष रहे हैं, कई बार ऐसे लोग प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं, जो अपना पूरा समय पार्टी के लिए देते हैं। उनके लिए अगर वे पार्टी के संसाधनों का उपयोग नहीं करेंगे, तो कहीं न कहीं वे अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पाएंगे। हर वह कार्यकर्ता, जो पार्टी को समय दे रहा है और जिसके पास संसाधन नहीं हैं, वह पार्टी के संसाधनों का उपयोग करेगा लेकिन मैं आर्थिक रूप से भी सक्षम हूं। पार्टी ने मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है, तो मैं क्यों पार्टी के संसाधनों का उपयोग करूं। जिस कार्यकर्ता को जरूरत है, उसे साधन उपलब्ध कराए जाएं। मेरे पास अपने साधन हैं यह मेरी सोच है।
भास्कर : बैतूल के बीमार व्यक्ति के लिए लिखे पत्र के लेटरहेड में प्रदेश अध्यक्ष के पदनाम का जिक्र क्यों नहीं था? हेमंत खंडेलवाल : प्रदेश अध्यक्ष एक दायित्व है। क्षेत्र के काम और लोगों की मदद करना विधायक के नाते मेरी जिम्मेदारी है। विकास या बीमारी सहायता के लिए पत्र लिखते समय प्रदेश अध्यक्ष का लेटर हेड लगाना उचित नहीं है। जहां संगठन से जुड़ा निर्णय होगा, वहां मैं प्रदेश अध्यक्ष हूं; और बैतूल के काम में मैं विधायक हूं। पदनाम का उपयोग जरूरत के अनुसार ही करूंगा।
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