Dhanbad News: धनबाद जिले के कतरास क्षेत्र अंतर्गत झींझी पहाड़ी गांव में स्थित बूढ़ा बाबा शिव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है. यह मंदिर 9वीं सदी का है. इस मंदिर का निर्माण बिना सीमेंट और बालू के केवल पत्थरों के जोड़ से किया गया है, जो आज भी अपनी मजबूती के साथ खड़ा है.
स्थानीय निवासी शत्रुघ्न महतो के अनुसार वर्तमान में जहां मंदिर स्थित है. वह क्षेत्र पहले घना जंगल और जलस्रोतों से भरा हुआ था. यह भूमि उनके परदादा की बताई जाती है. उन्होंने बताया कि एक दिन उनके परदादा जंगल में भ्रमण के लिए गए थे. उन्होंने देखा कि एक स्थान से स्वतः दूध बह रहा है. यह दृश्य देखकर वे भयभीत हो गए और गांव लौटकर अन्य लोगों को इसकी जानकारी दी. अगले दिन जब ग्रामीण उस स्थान पर पहुंचे.वहां भगवान शिव का शिवलिंग प्रकट हुआ पाया गया. इसके बाद श्रद्धा और आस्था के साथ उस स्थल की पूजा शुरू हुई. कालांतर में वही स्थान बूढ़ा बाबा शिव मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित हो गया.
यह मंदिर 1200 वर्षों पुराना
मंदिर की संरचना अपने आप में अद्वितीय है. इस मंदिर की स्थापना भगवान विश्वकर्मा द्वारा की गई मानी जाती है. मंदिर का ढांचा पूरी तरह पत्थरों के सहारे खड़ा है, जिसमें किसी भी प्रकार के आधुनिक निर्माण सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया है. मंदिर किसी एक ओर झुका हुआ है और कभी भी गिर सकता है, लेकिन सदियों से यह मंदिर उसी स्थिति में अडिग खड़ा है, जो प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्ट मिसाल है.करीब 1200 वर्षों से मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भक्त भगवान शिव के शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं. विशेषकर सावन माह, महाशिवरात्रि और सोमवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.भक्त अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बूढ़ा बाबा से आशीर्वाद मांगते हैं.
बूढ़ा बाबा शिव मंदिर
धनबाद शहर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से भी घिरा हुआ है. पहाड़ी क्षेत्र, हरियाली और शांत वातावरण इसे एक आध्यात्मिक पर्यटन स्थल बनने की पूरी क्षमता प्रदान करता है. हालांकि, अब तक इस स्थल का समुचित विकास नहीं हो सका है.शत्रुघ्न महतो सहित स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बूढ़ा बाबा शिव मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए. उनका कहना है कि यदि यहां सड़क, बिजली, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाए तो न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा होगी, बल्कि आसपास के लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. पर्यटन के विकास से स्थानीय युवाओं को गाइड, दुकान, परिवहन और अन्य सेवाओं के माध्यम से आर्थिक लाभ मिल सकता है.
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